बांग्ला पंचांग की पहली सोमवारी कल, कुम्हिया शिव मंदिर में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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आस्था का केंद्र दिघलबैंक प्रखंड का कुम्हिया शिव मंदिर | Prabhat Khabar Network

आस्था का केंद्र दिघलबैंक प्रखंड का कुम्हिया शिव मंदिर | Prabhat Khabar Network

बांग्ला पंचांग की पहली सोमवारी कल से शुरू हो रही है. सीमांचल के प्रसिद्ध कुम्हिया शिव मंदिर में श्रद्धालुओं के भारी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है. मंदिर प्रबंधन और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.

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सीमांचल के हिंदू धर्मावलंबियों और शिव भक्तों के लिए कल का दिन बेहद पवित्र और ऐतिहासिक होने जा रहा है. बांग्ला पंचांग के अनुसार पवित्र सावन महीने की पहली सोमवारी कल सोमवार से प्रारंभ हो रही है. इस पावन अवसर पर ठाकुरगंज प्रखंड से सटे दिघलबैंक प्रखंड के ताराबाड़ी चौक के समीप स्थित सुप्रसिद्ध 'कुम्हिया शिव मंदिर' में सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है. इसे लेकर मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना का प्रमुख केंद्र

दिघलबैंक का यह ऐतिहासिक कुम्हिया धाम सिर्फ एक शिवालय नहीं, बल्कि संपूर्ण सीमांचल क्षेत्र में अटूट श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का एक बड़ा केंद्र माना जाता है:

  • मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता: स्थानीय बुजुर्गों और पुरोहितों के अनुसार, बाबा भोलेनाथ के इस दरबार में सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूरी होती है. यही वजह है कि यहां केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे किशनगंज जिले और सीमावर्ती क्षेत्रों से भक्त आते हैं.
  • आदिशक्ति का भव्य दरबार: मंदिर परिसर की मुख्य विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ माता आदिशक्ति (मां भगवती) का भी एक अत्यंत भव्य मंदिर स्थापित है. बांग्ला सावन में यहाँ शिव और शक्ति की संयुक्त पूजा का विशेष धार्मिक व तांत्रिक महत्व माना जाता है, जहाँ लोग सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं.

गूंजेंगे मंत्रोच्चार, मंदिर प्रबंधन की तैयारियां पूरी

पहली सोमवारी को लेकर कुम्हिया धाम में व्यापक प्रशासनिक और प्रबंधकीय तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि कतारों में खड़े भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो:

  1. सुगम जलाभिषेक: महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग और कतारों की व्यवस्था की गई है. दिनभर चलने वाले भजन-कीर्तन, विशेष आरती और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा.
  2. सांस्कृतिक धरोहर: ग्रामीणों के अनुसार, यह परिसर इस पूरे इलाके की धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जो सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है.

पौआखाली और आसपास के शिवालयों में भी मचेगी धूम

कुम्हिया धाम के मुख्य आयोजन के अतिरिक्त, पौआखाली नगर परिषद क्षेत्र और उसके ग्रामीण अंचलों में भी पहली सोमवारी को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है. कल सुबह से ही निम्नलिखित प्रमुख शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ जलार्पण के लिए उमड़ेगी:

  • शहरी क्षेत्र: पौआखाली नगर के फूलबाड़ी और नानकार स्थित शिव मंदिरों को विशेष रूप से फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया गया है.
  • ग्रामीण इलाके: खारुदह, रानीगंज दस्तूर, पांचगाछी, शिवगंज बालूबाड़ी, कादोगांव, गंभीरगढ़ और कद्दूभिट्ठा आदि ग्रामीण क्षेत्रों के शिवालयों में भी बड़े पैमाने पर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक की तैयारियां पूरी हैं.

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय युवाओं की कमेटियां और वालंटियर्स भी जगह-जगह पेयजल और प्राथमिक सहायता शिविर लगाने की तैयारी में जुटे हैं.


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