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शिशु के हर क्रियाकलाप में छिपा है शारीरिक व मानसिक विकास का संकेत

Updated at : 04 Jan 2026 11:40 PM (IST)
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शिशु के हर क्रियाकलाप में छिपा है शारीरिक व मानसिक विकास का संकेत

शिशु के हर क्रियाकलाप में छिपा है शारीरिक व मानसिक विकास का संकेत

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से एक वर्ष तक का समय जीवन भर के स्वास्थ्य की दिशा तय करता है किशनगंज. शिशु का जन्म केवल एक परिवार के लिए खुशी का क्षण नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के निर्माण की शुरुआत भी है. विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से लेकर पहले एक वर्ष तक का समय शिशु के मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र व शारीरिक संरचना के विकास के लिए सबसे निर्णायक होता है. इस दौरान शिशु की हर छोटी-बड़ी गतिविधि रोना, मुस्कुराना, हाथ-पैर चलाना, आवाज़ निकालना-उसके सही या असंतुलित विकास की ओर संकेत करती है. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी कहते हैं कि स्वस्थ शिशु ही स्वस्थ समाज की आधारशिला है. यदि शिशु के पहले वर्ष में पोषण, देखभाल व निगरानी में चूक होती है. उसका असर जीवन भर पड़ सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शिशु के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास पहले दो वर्षों में होता है. इसमें पहला वर्ष सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है. इसी कारण यह अवधि वैश्विक स्तर पर ‘क्रिटिकल विंडो ऑफ डेवलपमेंट’ कही जाती है. शिशु विशेषज्ञ डॉ मंजर आलम ने बताया कि है कि शिशु के पहले वर्ष की गतिविधियों पर नियमित निगरानी, समय पर टीकाकरण, संतुलित पोषण और चिकित्सकीय परामर्श से न केवल शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है, बल्कि समाज को एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी भी दी जा सकती है.सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने अभिभावकों से अपील की कि वे शिशु के किसी भी असामान्य व्यवहार को हल्के में न लें और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता दें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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