मंदिरों में गूंजी शंख व घंटे की ध्वनि

Published at :31 Mar 2017 5:47 AM (IST)
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मंदिरों में गूंजी शंख व घंटे की ध्वनि

किशनगंज : हाथों में फूलों की माला, नारियल और चुनरी, जुबा पर मां दुर्गा के मंत्र व जयकारे और हर जयघोष पर हवा में लहराते हाथ. ये दृश्य थे शहर के बड़ीकोठी, खगड़ा मंदिरों के. नवरात्र के दूसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना को उमड़े श्रद्धालु भगवती के दर्शन कर जीवन को धन्य करने के […]

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किशनगंज : हाथों में फूलों की माला, नारियल और चुनरी, जुबा पर मां दुर्गा के मंत्र व जयकारे और हर जयघोष पर हवा में लहराते हाथ. ये दृश्य थे शहर के बड़ीकोठी, खगड़ा मंदिरों के. नवरात्र के दूसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना को उमड़े श्रद्धालु भगवती के दर्शन कर जीवन को धन्य करने के लिए आतुर दिखे. मंदिरों में मंत्रों से गुंजायमान रहा. गुरुवार को शहर के माता के मंदिरों में भक्तों की भीड़ एकत्र होने लगी. भक्त नंगे पांव मंदिर पहुंचे. बड़ों के साथ बच्चे भी दर्शन को लालायित दिखे.

भोर में जैसे ही मंदिरों के पट खुले मां का जयकारा वातावरण में गूंज उठा. गुरुवार को तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा का पूजन श्रद्धालुओं ने किया. मंदिरों में शंख और घंटे की ध्वनि से वातावरण गूंजता रहा. बड़ीकोठी, शीतला मंदिर, खगड़ा चैती दुर्गा आदि मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही.

मंदिरों से लेकर घरों तक हुई शक्ति की आराधना : ठाकुरगंज प्रतिनिधि के अनुसार, देवी मंदिरों में सुबह से घंटे घड़ियाल बजने के साथ ही चैत्र नवरात्र का पूजा-अर्चना की गयी. सभी प्रमुख देवी मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं ने मां का पूजन-अर्चन किया. नवरात्र व्रत रखने वाले भक्तों ने घरों में भी कलश स्थापना कर पूजन अर्चन किया.
चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के अनुसार बुधवार से नवसंवत्सर का आरंभ हो गया. पहले दिन मां आदि शक्ति के शैलपुत्री और ब्रह्माचारिणी रूपों का पूजन के बाद बुधवार को चंद्रघंटा पूजन हुआ.
प्रकृति से जोड़ता है नवरात्र : किशनगंज प्रतिनिधि के अनुसार, नवरात्र का धार्मिक व अध्यात्मिक महत्व तो है ही. प्राकृतिक तौर पर भी बेहद महत्व है.
नवरात्रों को ऋतुओं की दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण माना गया है. आराधना, उपासना, उपवास आदि करने से मनुष्य को शारीरिक व मानसिक शक्ति मिलती है. वासंतिक एवं शारदीय नवरात्र पर ऋतुओं का परिवर्तन होता है. जिसका वातावरण पर असर पड़ता है. इसमें नवचंडी, सहस्त्रचंडी, शतचंडी, लक्ष्यचंडी यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत कल्याणकारी होता है, क्योंकि साधक का अध्यात्म के साथ प्रकृति से जुड़ाव भी होता है.
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