शुद्ध जल को तरस रहे दिघलबैंकवासी समस्या . शोभा बढ़ा रहे जलमीनार व संयत्र
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Dec 2016 3:31 AM (IST)
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दिघलबैंक प्रखंड के लाखों की आबादी सजा-ए-कालापानी को अपनी नियति मान चुकी हैं.क्योंकि यहां के लोगों को अभी भी शुद्ध पेयजल मिलने का इंतजार है. मात्र 10 से 15 फ़ीट की गहराई पर भू-जल तो उपलब्ध है लेकिन यह पूर्ण रूप से प्रदूषित है और पीने योग्य नहीं है़ दिघलबैंक : कहना बड़ा आसान है […]
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दिघलबैंक प्रखंड के लाखों की आबादी सजा-ए-कालापानी को अपनी नियति मान चुकी हैं.क्योंकि यहां के लोगों को अभी भी शुद्ध पेयजल मिलने का इंतजार है. मात्र 10 से 15 फ़ीट की गहराई पर भू-जल तो उपलब्ध है लेकिन यह पूर्ण रूप से प्रदूषित है और पीने योग्य नहीं है़
दिघलबैंक : कहना बड़ा आसान है कि हमारा देश विकासशील है लेकिन यह कैसा विकास है कि आज़ाद भारत के 70 साल बीत जाने के बाद भी आम आदमी को शुद्ध पेयजल तक सरकारें मुहैया नहीं करवा पायी है.
जब पानी की ये स्थिति है तो अन्य चीज़ों का अनुमान लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है. भारत-नेपाल की सीमा पर बसे दिघलबैंक प्रखंड के लाखों की आबादी सजा-ए-कालापानी को अपनी नियति मान कर अपना जीवन जी रही हैं.क्योंकि यहां के लोगों को अभी भी शुद्ध पेयजल मिलने का इंतजार है. मात्र 10 से 15 फ़ीट की गहराई पर भू-जल तो उपलब्ध है लेकिन यह पूर्ण रूप से प्रदूषित है और पीने योग्य नहीं है़ जानकारों की माने तो पानी में आवश्यकता से कई गुणा अधिक लौह तत्व तथा आर्सेनिक की मात्रा ने यहां के पानी को जहरीला बना दिया है. जिस कारण से लोग कई प्रकार के बीमारियों के लगातार पीड़ित हो रहे हैं .
जिसमे चर्मरोग, कब्ज, लीवर, एसनोफिलिया, दांत के रोग सहित दर्जनों बीमारी शामिल है तथा इस मीठा जहर के रूप में इस पानी के सेवन से लोग असमय काल के गाल में भी समा रहें हैं. ऐसा नहीं है कि शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के सरकार के तरफ से कई बार योजनायें नहीं बनी . कई योजनाएं बनी जिसमें लाखों खर्च भी खर्च हुए लेकिन लोगों को पीने योग्य पानी नसीब नहीं हुआ. तुलसिया पुराना बाजार में कई दशक पूर्व लगाये जल संयत्र और प्रखंड मुख्यालय में बने जल मीनार इसकी एक बानगी भर है़
करोड़ों खर्च के बाद भी दिघलबैंक वासियों को पीने का पानी आज तक मयस्सर न हो सका. तुलसिया में लगाये गए जल शुद्धिकरण यंत्र बनने के बाद कभी चालू ही नहीं हुए. हां, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जब 2010 में विकास यात्रा के क्रम में जब तुलसिया आगमन हुआ था तब विभाग और प्रशासन ने इस जल शुद्धिकरण संयंत्र परिसर के रंग-रोगन में लाखों रुपये जरूर खर्च किये थे. कहीं सीएम साहब की नजर इस पर न पड़ जाये अब तो शायद इस पूरे संयत्र ने कचड़े का रूप धारण कर लिया है
और ठीक वैसी ही स्थिति दिघलबैंक प्रखंड मुख्यालय में कई वर्ष पूर्व बने जल मीनार की है जो लोगों का मुंह चिढ़ा रहा है. इसके अलावे दिघलबैंक बाजार, धनतोला, गंधर्वडांगा,सिंघिमारी, तालगाछ, फुटानीगंज, पदमपुर, इकड़ा, ताराबाड़ी सहित प्रखंड के अधिकांश इलाकों में जल शुद्धिकरण के लिए कोई योजना ही जमीन पर नहीं उतर सकी है. अब जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सात निश्चय के तहत हर घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की घोषणा की है तो यह उम्मीद जगी है कि अब दिघलबैंक काला पानी के श्राप से मुक्त हो पायेगा?
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