खाली हाथ घर वापस लौटे ग्राहक

Published at :10 Nov 2016 7:02 AM (IST)
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खाली हाथ घर वापस लौटे ग्राहक

कालाधन पर नकेल . 500 व 1000 के नोट पर रोक से दुकानों में पसरा सन्नाटा केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ व एक हजार के नोट बंद कर दिये जाने का बाजार पर व्यापक असर दिखायी पड़ा. ग्राहक खरीदारी के लिए बाजार, तो पहुंचे लेिकन दुकानदारों ने बड़ा नोट लेने से इनकार कर दिया. दोपहर […]

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कालाधन पर नकेल . 500 व 1000 के नोट पर रोक से दुकानों में पसरा सन्नाटा

केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ व एक हजार के नोट बंद कर दिये जाने का बाजार पर व्यापक असर दिखायी पड़ा. ग्राहक खरीदारी के लिए बाजार, तो पहुंचे लेिकन दुकानदारों ने बड़ा नोट लेने से इनकार कर दिया. दोपहर होते-होते बाजार में सन्नाटा पसर गया.
दिघलबैंक : 500 और 1000 रूपये के नोटों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश का ब्यापक असर प्रखंड के सबसे बड़े बाजार दिघलबैंक में हुआ. जहां सुबह से लोग खरीददारी के लिए पहुंचने लगे लेकिन दुकानदारों द्वारा बड़ा नोट लेने से इंकार किये जाने के बाद ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा़ दोपहर होते होते तो बाजारों में सन्नाटा पसर चुका था़ अधिकांश दुकानदार भी दुकान बंद कर घर की ओर रुख कर गये़ पूछने पर कई दुकानदारों ने बताया कि हर कोई 500 और 100 रूपये का नोट देकर सामान खरीदना चाहते है.
समय बरबाद करने से बेहतर है कि घर ही चला जाये़ एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ दिघलबैंक प्रखंड में लाखों का नुकसान हुआ है़ बुधवार को लगने वाले टप्पू हाट जहां किसान अपना अनाज बेचने बारे पैमाने पर आते है़ मगर नोटों को लेकर सरकारी आदेश ने कारोबार को बिलकुल ही ठप कर दिया.हालांकि लोग इस फैसले से बेहद खुश है कि मोदी सरकार का यह बहुत बड़ा और देश हित में लिया गया फैसला है़
1000 का नोट 800 तो 500 का नोट 400 में बदलने को ले अफवाहों का बाजार गर्म रहा
नेपाली नागरिक भी हुए परेशान : नेपाली करेंसी को लेकर पूर्व से परेशान नेपाली नागरिकों की मुश्किल बढ़ गयी है अब भारतीय नोटों को लेकर काफी परेशान है क्योंकि नेपाल में करीब -करीब हर जगह भारतीय करेंसी बे-रोक -टोक चलती है तथा नेपाल के सीमावर्ती बाजारों बिरतमोड, धुलाबारी, सुरूंगा,दमक इत्यादि जगहों पर ब्यापरिक लेंन देन भारतीय नोट से ही होता है ऐसे में ये लोग भी काफी परेशान है
काला धन को लेकर मोदी सरकार द्वारा किये गये आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक से आम आदमी खुश भी है और परेशान भी : आज़ादी के सत्तर साल के बाद पहली बार भारतीय करेंसी को लेकर मोदी सरकार ने जो मास्टर स्ट्रोक चला है, इसको लेकर क्या पक्ष और क्या विपक्ष सभी ने इस फैसले को सराहा है कि सरकार ने काफी सोच विचार और मंथन के बाद इस तरह का ऐतिहासिक निर्णय लिया है,और सरकार का निर्णय मील का पत्थर साबित हो सकता है, जानकारों की माने तो जाली नोट और आतंकी गतिविधि करने वालो के लिए सरकार ने सभी रस्ते बन्द कर दिए है, इसके अलावे देश में ही दो नम्बर का पैसा इकठ्ठा आर्थिक साम्राज्य स्थापित करने वालों के लिए बुरे दिन की शुरुआत मानी जा रही है.
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