बीमारी की चपेट में जिलावासी

Published at :30 Aug 2016 6:35 AM (IST)
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बीमारी की चपेट में जिलावासी

सावधान . मौसम के बदले मिजाज का स्वास्थ्य पर हो रहा असर श्वास संबंधित रोगों से पीड़ित मरीजों को बुखार, गले में खराश और दर्द, थूक निगलने से परेशानी, आवाज में भारीपन, बोलने में परेशानी, बार-बार छींक आना, सांस लेने में दिक्कत और सांस फूलना, कान में दर्द, शरीर में अकड़न और दर्द तथा सीने […]

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सावधान . मौसम के बदले मिजाज का स्वास्थ्य पर हो रहा असर

श्वास संबंधित रोगों से पीड़ित मरीजों को बुखार, गले में खराश और दर्द, थूक निगलने से परेशानी, आवाज में भारीपन, बोलने में परेशानी, बार-बार छींक आना, सांस लेने में दिक्कत और सांस फूलना, कान में दर्द, शरीर में अकड़न और दर्द तथा सीने में दर्द की शिकायत हो सकती है.
दिघलबैंक : भादो माह की शुरुआत होते ही मौसम में उतार चढ़ाव भारी पड़ने लगा है. सुबह सात बजे ही तेज धूप निकल जाती है. भीषण गर्मी और उमस के कारण लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं. कभी गर्मी तो कभी मौसम में नमी के एहसास के बीच वायरल फीवर और श्वास संबंधित बीमारियों की चपेट में लोग आने लगे हैं. अस्पताल और डॉक्टरों के पास सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर, श्वास संबंधित बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ने लगी है.
जिसे देखते हुए अब लोगों को बदलते मौसम के अनुसार खान-पान और पहनावे पर विशेष ध्यान देने की सलाह चिकित्सक दे रहे हैं. अभी बरसात का मौसम है. इस मौसम में कभी भीषण उमस तो कभी तापमान में गिरावट के कारण लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. बदलते मौसम के कारण अधिकतम और न्यूनतम तापमान में काफी अंतर अब लोगों के सेहत बिगाड़ रही है. जिले में अधिकतम तापमान 32 डिग्री तक पहुंच गया है तापमान में यह उतार चढ़ाव लोगों पर असर डालने लगा है.
प्राथमिक स्वास्थ केंद्र सहित निजी चिकित्सकों के पास पहुंचने वालों में 30 से 35 प्रतिशत मरीज मौसम की मार से पीड़ित हैं. दिघलबैंक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ देवेंद्र कुमार बताते हैं कि मौसम की मार झेल रहे मरीजों में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, एलर्जी, दमा और श्वास संबंधित बीमारियां पायी जा रही है. निजी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में भी यही स्थिति देखी जा रही है.
बीमारियों के लक्षण
मौसम में बदलाव के कारण श्वास संबंधित रोगों से पीड़ित मरीजों को बुखार, गले में खराश और दर्द, थूक निगलने से परेशानी, आवाज में भारीपन, बोलने में परेशानी, बार-बार छींक आना, सांस लेने में दिक्कत और सांस फूलना, कान में दर्द, शरीर में अकड़न और दर्द तथा सीने में दर्द की शिकायत हो सकती है.
खान पान और पहनावे पर विशेष ध्यान देने की जरुरत
डॉक्टर बदलते मौसम के समय पहनावे पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं। वे कहते हैं कि तापमान में उतार चढ़ाव के अनुसार कपड़े पहनना चाहिए। पोषक आहार लेना चाहिए। खाने में सब्जी, सलाद और फल को शामिल करना चाहिए। चिकित्सक कहते हैं कि बीमारियों से बचे रहने के लिए पर्याप्त पानी भी पीना चाहिए.
चर्म रोग से सबसे ज्यादा परेशानी
लोहयुक्त पानी और मौसम की बेरुखी से दिघलबैंक प्रखंड में लोग त्वचा रोग से ज्यादा पीड़ित है यहाँ नब्बे प्रतिशत लोग खुजली और दाद से तंग है.
क्या कहतें है डॉक्टर
चिकित्सक बताते हैं कि तापमान में उतार चढ़ाव के समय वायरल इन्फेक्शन अधिक देखे जाते हैं. लेकिन इनके गंभीर होने की वजह बैक्टीरिया ही होते हैं. चिकित्सक कहते हैं कि मौसम में बदलाव के कारण सुस्ती महसूस होती है। एसिडिटी के कारण पेट में जलन तथा खट्टी डकार आने की शिकायत भी हो सकती है।
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