भगवान विष्णु के अवतारों की सुनायी गयी कथा

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ठाकुरगंज : ठाकुरगंज में आयोजित हो रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के चौथे दिन मंगलवार को भगवान के विभिन्न अवतारों की कथा सुनाई गयी. कथावाचक बाल व्यास केशव कृष्ण जी महाराज ने कहा कि भागवत का सार है ऊं नमो भगवते वासुदेवाय: नम: . जब अमृत की प्राप्ति के लिए देवों एवं असुरों ने समुद्र […]

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ठाकुरगंज : ठाकुरगंज में आयोजित हो रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के चौथे दिन मंगलवार को भगवान के विभिन्न अवतारों की कथा सुनाई गयी. कथावाचक बाल व्यास केशव कृष्ण जी महाराज ने कहा कि भागवत का सार है ऊं नमो भगवते वासुदेवाय: नम: . जब अमृत की प्राप्ति के लिए देवों एवं असुरों ने समुद्र मंथन शुरू किया तब भगवान ने कच्छप का अवतार लिया एवं अपने ऊपर मथनी रखा.

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जिससे समुद्र का मंथन हुआ. केशव महाराज ने कहा कि श्री गणेश के नाम के बिना कोई सफल नहीं होता है. समुद्र मंथन के समय भी पहले गणेश जी की प्रार्थना की गयी तब मंथन शुरू हुआ. उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन में 14 रत्न की प्राप्ति हुई थी.
सबसे पहले हताहत विष निकला जिससे सभी देव एवं असुर डर गये. तब उन्होंने भगवान शंकर को पुकारा. भगवान शंकर ने उक्त विष को ग्रहण किया एवं विष को गले में संग्रहित रखा तभी से भगवान शंकर नीलकंठ कहलाए. समुद्र मंथन से लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, कोस्तु मणी, परिजात, धनवंतरी, चंद्रमा, कामधेनु, धनुष आदि रत्न का प्रादुर्भाव हुआ. सबसे अंत में अमृत का प्रादुर्भाव हुआ.
उन्होंने कहा कि दूब घास अमृत की देन है. इसलिए यह अमृत के समान पवित्र है. अमृत के लिए देव एवं असुर को आपस में लड़ता देख भगवान में मोहिनी अवतार लिया एवं मोहिनी ने देवों को अमृत का पान कराया. इससे असुर क्रोधित हो गये एवं देव पर आक्रमण कर दिया एवं स्वर्ग पर कब्जा कर लिया.
इसके बाद देव भगवान नारायण के पास गये एवं राक्षसों से रक्षा की गुहार लगायी. इस पर भगवान ने अदिति की कोष से वामन के रूप में जन्म लिया जो भगवान का वामन अवतार कहलाया. भगवान में वामन रूप कर राक्षसों के राजा बलि से तीन कदम की जमीन दान में मांगी. दानवीर बलि ने वामन द्वारा मांगे गये दान को स्वीकार किया तब वामन भगवान ने तीन कदम में पूरी सृष्टि को नाप लिया. राजा बलि भगवान की लीला से प्रभावित हुए एवं इंद्रलोक को मुक्त किया. पंडित केशव कृष्ण जी महाराज द्वारा सुनाये जा रहे कथा को भक्त पुरी भाव के साथ सुन रहे थे.
इस दौरान फुल चंद्र अग्रवाल और सरस्वती देवी के अलावे मुरारी अग्र्रवाल दिलीप अग्रवाल, कृष विहारी, कमला अग्रवाल, बिमल अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, जुगल अग्रवाल, संजय अग्रवाल, मदन केजड़ीवाल, श्रवण अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, लक्ष्मी देवी, प्रीति अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, बबिता, कविता, रीना, खुशबु, स्वेता अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, सुशीला अग्रवाल, प्राची अग्रवाल, सोनू पौद्दार र आदि मौजूद थे.
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