तो क्या मकई की खुशबू खींच लाती है भारतीय क्षेत्र में गजराज को

Published at :31 Jan 2018 5:46 AM (IST)
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तो क्या मकई की खुशबू खींच लाती है भारतीय क्षेत्र में गजराज को

दिघलबैंक : भारत-नेपाल के सीमावर्ती दिघलबैंक प्रखंड में गजराज का उत्पात कोई नया नहीं है. बीते कई सालों से मकई की फसल के समय इन हाथियों के झुंड के लगातार आगमन से ग्रामीण दहशत में है. वर्ष 2016 में इसी तरह हाथियों के एक झुंड ने एक व्यक्ति की जान भी ले ली थी, अब […]

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दिघलबैंक : भारत-नेपाल के सीमावर्ती दिघलबैंक प्रखंड में गजराज का उत्पात कोई नया नहीं है. बीते कई सालों से मकई की फसल के समय इन हाथियों के झुंड के लगातार आगमन से ग्रामीण दहशत में है. वर्ष 2016 में इसी तरह हाथियों के एक झुंड ने एक व्यक्ति की जान भी ले ली थी, अब जबकि फिर से मकई की फसल खेतों में लहलहा रही है, तो गजराज का आगमन एक बार फिर से शुरू है. दिघलबैंक प्रखंड में इस साल अब तक का यह चौथा मामला है,

जिसमें इन मतवाले हाथियों ने खेतों की फसलों को बुरी तरह से तहस-नहस कर दिया और लोग काफी भयभीत है. स्थानीय लोगों की मानें, तो आने वाले कुछ समय में इन हाथियों का कोहराम जारी रहेगा और लोग अभी से बदहवास हो रहे हैं, हालांकि केवल सीमा के गांव पर ही इन जंगली हाथियों का खौफ नहीं है. बल्कि काफी भीतर तक ये चले आते है और जो भी सामने आता है. बीते साल सीमा से करीब 20 किलोमीटर भीतर बीवीगंज और तालगाछ तक हाथियों का आतंक देखा गया, जबकि गंधर्वडांगा सतमेढ़ी इलाके में भी हाथियों के झुंड ने जम कर उत्पात मचाया था. लोगों की माने तो नेपाल और पश्चिम बंगाल में बचे हुए शेष जंगलों से भटककर ये हाथी मकई के मौसम में इधर चले आते हैं

फ़िलहाल नेपाल के पूर्वी सीमा बसे डोरिया, धनतोला सहित सीमा के समीप बसे गांव और बस्ती के लोगों की रातों की नींद इन हाथियों ने उड़ा दी है.

तेजी से समाप्त हो रहा वन क्षेत्र है इसका कारण : नेपाल सीमा के उस पर भागोडुब्बा,लक्ष्मीथान के इलाके में किसी ज़माने घनघोर जंगल हुआ करता था, लेकिन लकड़ी माफियाओं के कारण उन इलाकों के जंगल भी धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर है. लिहाजा इन जंगलों से हाथी समेत विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों का भटक कर भारतीय सीमा के भीतर लगातार आगमन हो रहा है.
ग्रामीण हैं भयभीत : सीमा पर बसे गांव, हाट बाजार के अलावे देर शाम को इन इलाकों में घर लौटने वाले लोग इन हाथियों से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उनको अब ये लगने लगा है कि हाथी कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है.
फसलें हो रही है बर्बाद : इन जंगली हाथियों के उत्पात से किसान भी काफी परेशान है. खेतों को अपने खून-पसीने से सींच कर हरा-भरा करने की तमाम मेहनत को गजराज तहस-नहस करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
वन विभाग की एक टीम की तैनाती की मांग : हाथियों के लगातार इस तरह के आतंक से परेशान लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है. कुछ दिनों के लिए वन विभाग की एक टीम की तैनाती यहां आवश्यक है, ताकि समय रहते इन हाथियों पर लगाम लगाया जा सके और लोगों को समय सुरक्षित किया जा सकेगा.
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