पत्रकार समाज का आइना, तथ्यपरक जानकारी देना जिम्मेदारी: सत्यनारायण

डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा बिहार कृषि विश्वविद्यालय को प्राप्त ‘ए’ ग्रेड की उपलब्धि के उपलक्ष्य में “उत्कृष्टता का उत्सव” धूमधाम से मनाया गया
डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय में उत्कृष्टता का उत्सव, 60 प्रशिक्षणार्थियों को मिला प्रमाण पत्र, पत्रकार हुए सम्मानित पोठिया डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा बिहार कृषि विश्वविद्यालय को प्राप्त ‘ए’ ग्रेड की उपलब्धि के उपलक्ष्य में “उत्कृष्टता का उत्सव” धूमधाम से मनाया गया. पूरे परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल दिखा. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ के सत्यनारायण ने इस उपलब्धि का श्रेय महाविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के साथ- साथ पत्रकारों को भी दिया. उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने लगातार संस्थान की उपलब्धियों और गतिविधियों को जन जन तक पहुंचाया, जिससे महाविद्यालय की पहचान मजबूत हुई. उन्होंने कुलपति डॉ डीआर सिंह के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि आगे और बेहतर परिणाम के लिए टीम भावना के साथ काम जारी रहेगा. इस मौके पर सीसीआईएनएम सर्टिफिकेट कोर्स के 15वें बैच का समापन भी हुआ. प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए. साथ ही 60 प्रशिक्षणार्थियों को उर्वरक प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र वितरित किया गया. इसे कौशल विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य ने पत्रकारों को सम्मानित भी किया. उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का आईना हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि वे सही और तथ्यपरक जानकारी लोगों तक पहुंचाएं. कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी खबरों को प्रमुखता देने में पत्रकारों की भूमिका सराहनीय रही है. महाविद्यालय सीमांचल क्षेत्र में कृषि अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. यहां किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. दर्जनों शोध परियोजनाएं चल रही हैं, जिनका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है. महाविद्यालय में गरमा धान, अनानास की प्रजातियों का परीक्षण, टिशू कल्चर प्रयोगशाला, मक्का की अंतरफसली खेती, चाय और ड्रैगन फ्रूट पर अनुसंधान किया जा रहा है. एक्सीलेंस टी रिसर्च सेंटर, सेरीकल्चर केंद्र और हॉर्टिकल्चर रिसर्च सेंटर के माध्यम से उन्नत शोध जारी है. किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘सीमांचली भक्का’ और स्थानीय सुगंधित धान ‘बासमथी’ को जीआई टैग दिलाने की पहल भी की जा रही है. इससे किसानों और महिला उद्यमियों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. कार्यक्रम की शुरुआत डॉ मो शमीम ने स्वागत भाषण से की. संचालन डॉ. श्वेता कुमारी ने किया. इस अवसर पर डॉ पीडी माने, डॉ बिरेन्द्र कुमार, डॉ स्वराज दत्ता, डॉ महेश कुमार, डॉ भोला नाथ साहा, डॉ एससी पाल, डॉ मुकुल कुमार, डॉ रश्मि कुमारी और डॉ लव कुमार सहित सभी प्राध्यापक और वैज्ञानिक मौजूद थे. विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ए’ ग्रेड की उपलब्धि, उन्नत शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सीमांचल में कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा. यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का प्रतीक बन रही है.
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