6200 एकड़ से अधिक खेत बालू से पटे

किशनगंज : प्रलयंकारी बाढ़ से हुए तबाही का मंजर चहुंओर दिख रहा है. बाढ़ से पहले लहलहाते धान के खेत में अब रेत (बालू) है. जिले में महानंदा, कनकई, डोक आदि नदियों से सटे करीब 6200 एकड़ से अधिक धान के खेत बालू से पट गये है. बाढ़ के बाद किसान बेहाल व परेशान दिख […]
किशनगंज : प्रलयंकारी बाढ़ से हुए तबाही का मंजर चहुंओर दिख रहा है. बाढ़ से पहले लहलहाते धान के खेत में अब रेत (बालू) है. जिले में महानंदा, कनकई, डोक आदि नदियों से सटे करीब 6200 एकड़ से अधिक धान के खेत बालू से पट गये है. बाढ़ के बाद किसान बेहाल व परेशान दिख रहे है. जिले में बाढ़ से चार करोड़ 25 लाख से अधिक कृषि से जुड़े फसलों के क्षति का अनुमान लगाया गया है.
जिले में 84 हजार 2 सौ 83 हेक्टेयर में धान की खेती की गयी है. वास्तविक क्षति के आंकलन के लिए कृषि विभाग जिले के सभी 126 पंचायतों में सर्वेक्षण करा रही है. किशनगंज जिले में सबसे अधिक धान की खेती पर असर पड़ा है. जिले के प्रसिद्ध फसलों में अदरक, हल्दी ,अनानास की खेती को व्यापक नुकसान हुआ है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




