अतिक्रमित भूमि किये जा रहे चिह्नित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jul 2017 4:49 AM (IST)
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पहल. रमजान नदी को पुनर्जीवित करने आगे आया जिला प्रशासन, खुशी की लहर किशनगंज : एक ओर जहां रमजान नदी पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भविष्य को ध्यान में रखते हुए नदियों को बचाने के लिए आगे आ रहे हैं. फिलहाल रमजान नदी को […]
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पहल. रमजान नदी को पुनर्जीवित करने आगे आया जिला प्रशासन, खुशी की लहर
किशनगंज : एक ओर जहां रमजान नदी पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भविष्य को ध्यान में रखते हुए नदियों को बचाने के लिए आगे आ रहे हैं. फिलहाल रमजान नदी को पुनर्जीवित करने को जिला प्रशासन आगे आया है. आमजनों से मिली शिकायत के बाद जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित ने रमजान नदी को बचाने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर सात दिनों के अंदर अतिक्रमण का रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया है.
किशगनंज शहर के बीचों-बीच रमजान नदी में कभी जल की धारा इतनी अधिक प्रवाह होती थी कि लोग नदियों के पास पानी की पठारों को देखकर ही घबराते थे. नदियों के आस पास स्थित किसानों और शहर के लोगों ने रमजान नदी पर कब्जा कर इनका अधिक भाग अपनी खेतीबाड़ी व घर द्वार व मकान के नाम कर लिया. रमजान नदी का अस्तित्व लगभग खत्म सा हो गया. तत्कालीन जिलाधिकारी आरएसबी सिंह, फेराक अहमद और अनिमेष पराशर ने रमजान नदी को पुनर्जीवित करने को बड़े पैमाने पर अभियान चलाया और लोगों को एक आस बंधी की अब रमजान में जल प्रवाह होगा.
परन्तु शहर के कुछ अतिक्रमणारियों, भू-माफियओं व कुछ नेताओं को डीएम का यह प्रयास काफी अखड़ा और उनके स्थानांतरण के बाद अभियान बीच में ही बंद करना पड़ा. अब फिर शहर के समाजसेवियों से मिली शिकायत के बाद वर्तमान जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित ने रमजान नदी को बचाने का बीड़ा उठाया है. जिला पदाधिकारी के निर्देश के बाद गठित टीम के सदस्यों ने अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व रमजान नदी के अतिक्रमित भूमि का मापी का कार्य प्रारंभ कर दिया है. जिससे शहर में भू-माफियाओं व अट्टालिका मालिकों में हड़कंप मच गया है.
तीन दसक में ही बसे दर्जनों गांव
सदियों से रमजान नदी के किनारे पर दर्जनों गांव बस गए.रमजान नदी के उदगम स्थल से लेकर महानंदा नदी में मिलने के बीच दर्जनों गांव,किशनगंज शहर बसे है.किशनगंज प्रखंड की बात करे तो टुपामारी, नोउखला, अमलझारी, चिलमारी, चगलिया, डेंगापार, काशीपुर, सतिघटा, चौन्दी, लोहाडांगा, बेरगाछी, बनबारी, गाछपारा, झारबारी, कोल्हा, ठौआपारा, ढेकसारा, घोरामारा आदि कई गांव रमजान नदी किनारे बसे है.
शहर में बीचोबीच 8 किलोमीटर बहती है रमजान नदी
शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाली रमजान नदी किशनगंज शहर के बीचोबीच करीब 8 किलोमीटर में बहती है.रमजान नदी शहर को दो हिस्सों में बांटती भी है.शहर के पोस इलाके से बहने वाली रमजान शहर की शान व पहचान बनी हुई है.शहर के ढेकसारा से शुरू होकर खगड़ा माझिया तक करीब 8-10 किलोमीटर रमजान पूरे शहर को छू कर बंगाल की और बढ़ती है. शहर से करीब 20 किलोमीटर उत्तर पोठिया-किशनगंज प्रखंड के सीमा से सटे डोक नदी बहती है.वही से रमजान नदी का उदगम होने की मान्यता है. उदगम स्थल अवरूद्ध होने के साथ रमजान नदी के दोनों किनारे अतिक्रमित कर लेने से मृत प्राय हो गया है.
अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन के लिए चुनौती
शहर के बीचों बीच बहने वाली रमजान नदी को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये जिला प्रशासन की पहल शहर के लिये वरदान साबित होगा. रमजान नदी को अतिक्रमण मुक्त बनाने की राह आसान भी नहीं है. भू-माफियाओं द्वारा अतिक्रमित भूमि को लेकर उत्पन्न समस्या से निपटने के लिये प्रशासन को तैयार रहना पड़ सकता है. इस बार शहरवासी सहित किशनगंज नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावे सभी वार्ड पार्षद प्रशासन के साथ खड़े हैं. पिछले कई वर्षों बाद अतिक्रमण मुक्त रमजान नदी की चर्चा के साथ कर्रवाई भी प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गयी है. पिछले शनिवार से एसडीएम मो शफीक के नेतृत्व में रमजान नदी को अतिक्रमण मुक्त करने की कवायत शुरू की
गयी.अचानक प्रशासन के इस अभियान से लोग चकित जरूर हुए,लेकिन लोगों प्रशासन के इस कदम से हर्षित भी हैं. जिला प्रशासन के इस साहसी कदम को जिलेवासी सराह भी रहे हैं. शहर वासियों को उम्मीद जगी है की अब रमजान नदी फिर से अपने पुराने रंग में दिखेगी. शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने भी प्रशासन के इस अतिक्रमण मुक्त अभियान की सराहना करते हुए अंजाम
तक पहुंचाने की उम्मीद जता रहे है. अतिक्रमण मुक्त रमजान नदी का जल प्रवाह पहले जैसा हो जायेगा.इसका सीधा फायदा नदी किनारे बसे गांव के लोगों को भी होगा.सालों भर पानी बहने से नदी किनारे की जमीन पर किसानों को सिंचाई करना आसान हो जायेगा और उत्पादन भी अच्छा होगा.नदी का जल धारा से कई और लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा.
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