मौसम की बेरुखी से अस्पताल में बढ़ रही मरीजों की भीड़
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jun 2017 6:09 AM (IST)
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तेज धूप से अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइटस की हो जाती है कमी टेढ़ागाछ : मौसम में बदलाव के चलते मरीजों की भीड़ अस्पताल तथा निजी क्लीनिक में बढ़ने लगी है. बदलते मौसम में लोगों की एक छोटी सी लापरवाही उन्हें दस्त, तेज पेट दर्द, वायरल बुखार, चिकेन पाक्स, सर्दी-खांसी, पीलिया और टायफाइड […]
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तेज धूप से अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइटस की हो जाती है कमी
टेढ़ागाछ : मौसम में बदलाव के चलते मरीजों की भीड़ अस्पताल तथा निजी क्लीनिक में बढ़ने लगी है. बदलते मौसम में लोगों की एक छोटी सी लापरवाही उन्हें दस्त, तेज पेट दर्द, वायरल बुखार, चिकेन पाक्स, सर्दी-खांसी, पीलिया और टायफाइड जैसे रोगों के शिकार हो रहे हैं. यही नहीं जिन लोगों को फेफड़े संबंधित शिकायतें है उनकी भी समस्याएं वाहनों के काफिले से उड़ रही धूलकण से बढ़ रही है. टेढ़ागाछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के के चिकित्सक नियाज अहमद बताते हैं
कि दोपहर में तेज धूप से अत्यधिक पसीना निकलने के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइटस की कमी हो जाती है. इससे अधिक कमजोरी व पेट दर्द की समस्या आम हो जाता है. इससे बचने के लिए चीनी व नमक मिले जल अधिक मात्रा में सेवन के साथ खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलने की बात कहीं. बताया कि इस मौसम में वायरल, डायरिया तथा बुखार एकाएक आता है.
संक्रमित लोगों को अचानक ही तेज बुखार या उल्टी तथा दस्त शुरू हो जाती है. इसी के साथ चिकेन पाक्स, श्वास नली में संक्रमण, एलर्जी, पीलिया, टायफाइड जैसे रोग तेजी से फैलने लगता है. कहा कि मौसम के बदले परिवेश में स्वच्छ जल व ताजे भोजन के प्रयोग करने के साथ ही बीमार पड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
वायरल-डायरिया अधिक प्यास लगना, होठ मुंह सूखना, आंखों में सूखापन, बेचैनी, त्वचा खींचने पर अपनी जगह पर वापस आने में ज्यादा समय लगना, पेशाब में कमी साथ ही अचानक उल्टी व पानी जैसा बिना बदबू का दस्त. पीलिया भूख में कमी, उल्टी महसूस होना तथा पेशाब का पीला होना. टायफाइड तेज बुखार, सिर दर्द, खांसी, शरीर पर दाने, पेट में दर्द आदि. वायरल डायरिया कोई विशेष एंटी वायरल नहीं पानी एवं लवण की शरीर में कमी नहीं होने दे. वायरल फ्लू- चिकेन पाक्स, पीलिया, टायफाइड की प्रतिरोधक सूई है. जो इन रोगों से रक्षा करती है. एलर्जिक पदार्थो की पहचान करके उनकी प्रतिरोधक सूई भी उपलब्ध है. बताया कि इसके अलावा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को पीले फल जैसे पपीता, आम, गाजर, नींबू, मौसमी, अंडा और दूध का सेवन करना लाभदायक होगा.
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