दूर करें कारोबारियों की असमंजस : जंगी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jun 2017 5:37 AM (IST)
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जमीनी स्तर पर बिना तैयारी के एक जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का िवरोध कर रहे हैं लोग किशनगंज : जमीनी स्तर पर बिना तैयारी के एक जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) को लेकर कारोबारी असमंजस की स्थिति में हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा है […]
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जमीनी स्तर पर बिना तैयारी के एक जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का िवरोध कर रहे हैं लोग
किशनगंज : जमीनी स्तर पर बिना तैयारी के एक जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) को लेकर कारोबारी असमंजस की स्थिति में हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर ये कैसे होगा जब कंप्यूटर इंटरनेट की तकनीक से एक बड़े व्यापारी तबका अभी भी दूर है ऐसे में सॉफ्टवेयर के आधार पर टैक्स प्रणाली में ग्रामीण इलाकों तथा छोटे कारोबारी कैसे रिटर्न भरेंगे.
किशनगंज केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला सचिव जंगी प्रसाद दास ने कारोबारियों की समस्याओं की और ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि टैक्स प्रणाली को लेकर आज़ादी के बाद यह बड़ा बदलाव है़ लेकिन जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत तैयारी के बिना लागू करना अर्थात 80 से 90 प्रतिशत कारोबार पर संकट होगा क्योंकि अधिकांश लोग इसे समझ ही नहीं पा रहे हैं .
अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ और केंद्र के सत्तारूढ़ दल भाजपा के सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने भी जीएसटी के वर्तमान स्वरूप में खामियां बता कर सरकार को आगाह किया है कि ग्रामीण इलाकों और छोटे कारोबारियों पर इस टैक्स प्रणाली की जटिल प्रक्रिया को लागू कराना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है. इसमें बड़े बदलाव की मांग हो रही है. श्री दास ने कहा कि कुछ राज्यों में तो कारोबारी इसका विरोध भी कर रहें है़ उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर जो संदेह है़
पहले उसे दूर किया जाए और कारोबारियों को कुछ समय इसे समझने के लिए और मिलना चाहिए. दवा कारोबार में प्रथम बिंदु पर ही जीएसटी लगना चाहिये ताकि सरकार को एकमुश्त टैक्स भी जमा हो जाये और कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े. तीन महीने में एक बार टैक्स जमा करने का प्रावधान हो, सजा का प्रावधान समाप्त कर दंड का प्रावधान हो तथा रिभाइज रिटर्न का भी प्रावधान इसमें हो, तथा खुदरा कारोबारी से एकमुश्त खरीद-बिक्री का विवरण लेने का प्रावधान इसमें शामिल किया जाए. उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाके जहां इंटरनेट और तकनीक के स्थायी साधन उपलब्ध नहीं है
वहां इस टैक्स प्रणाली के कारण बिजनेस करने वाले के लिए कुछ प्रावधानों को भी जोड़ा जाना चाहिए. जीएसटी का हमलोग विरोध नहीं कर रहे हैं . लेकिन तकनीकी समस्याओं की और सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं ताकि इसमें ससमय बदलाव किया जा सके. जब तक इसके विभिन्न आयामों को लोग समझ नहीं जाते तब तक इसे नहीं लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर कारोबारियों और आम आदमी पर पड़ेगा.
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