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प्रसूता की मौत बाद डॉक्टर के क्लिनिक के आगे शव रखकर परिजनों ने किया हंगामा, जांच में जुटी पुलिस

Updated at : 28 Sep 2025 9:16 PM (IST)
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प्रसूता की मौत बाद डॉक्टर के क्लिनिक के आगे शव रखकर परिजनों ने किया हंगामा, जांच में जुटी पुलिस

क्लिनिक पर लाने के दौरान रास्ते में प्रसव पीड़िता को ब्लीडिंग होने लगा.

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ऑपरेशन बाद खून की कमी बताकर डॉक्टर ने कर दिया था रेफर, महेशखूंट के नौरंगा गांव की थी प्रसूता

खगड़िया. शहर के मिल रोड स्थित डॉ. आर एन जैन के क्लीनिक में प्रसव पीड़िता की ऑपरेशन के बाद मौत हो गयी. पीड़िता की मौत होने पर परिजनों सड़क पर शव रखकर हंगामा किया. क्लिनिक में तोड़फोड़ किया. घटना रविवार शाम की है. बताया जाता है कि महेशखूंट थाना क्षेत्र के नौरंगा गांव निवासी 25 वर्षीय फुल कुमारी आठ माह की गर्भवती थी. परिजनों ने इलाज के लिए डॉ. आरएन जैन के क्लिनिक पर लाया. क्लिनिक पर लाने के दौरान रास्ते में प्रसव पीड़िता को ब्लीडिंग होने लगा. चिकित्सक द्वारा अविलंब ऑपरेशन कराने की सलाह दी गयी. सहमति मिलते ही प्रसूता का ऑपरेशन डॉ. जैन द्वारा किया गया. ऑपरेशन के बाद प्रसूता की स्थित नाजुक हो गयी. चिकित्सक डॉ. जैन द्वारा ब्लड की जरूरत बताते हुए रेफर कर दिया. बताया जाता है कि इलाज के लिए बेगूसराय ले जाने के दौरान रास्ते में पीड़िता की मौत हो गयी. बलिया थाना क्षेत्र के ताजपुर दियारा निवासी रामाशीष यादव ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रविवार की दोपहर 12:00 बजे बेटी को क्लीनिक में भर्ती कराया था. चिकित्सक ने ऑपरेशन कर प्रसव कराने की बात कहकर पचास हजार रुपये ली. मृतका के पति रूपेश यादव ने बताया कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण पत्नी की मौत हुई है. ऑपरेशन किए जाने के बाद नवजात बच्ची ने जन्म लिया है. जो जीवित है. परिजनों ने क्लीनिक के आगे शव रखकर लगभग 4 घंटे तक हंगामा किया. घटना की जानकारी मिलने पर नगर थाना की पुलिस पहुंचकर जांच की.

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चिकित्सक के साथ अमानवीय व्यवहार चिकित्सा सेवा के लिए बाधक: आईएमए

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केप्सन. बैठक करते आईएमए व आईडीएम के अध्यक्ष व सचिव

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खगड़िया. डॉ आरएन जैन के क्लीनिक में तोड़फोड़ कर सड़क पर शव रखकर हंगामा करने के बाद आईएमए व आईडीए से जुड़े चिकित्सकों ने घटना की निंदा की. आईएमए व आईडीए की बैठक डॉ आरएन जैन के आवास पर रविवार की देर शाम हुयी. बैठक में डॉ. जैन ने बताया कि क्लिनिक में उपचाररत मरीज का अत्यधिक ब्लीडिंग एवं हीमोग्लोबिन की अत्यल्प मात्रा होने के कारण प्रसूता की मौत हो गयी. मरीज के परिजनों को तुरंत रक्त (ब्लड) की व्यवस्था करने के लिए कहा गया. लेकिन परिजन रक्त उपलब्ध नहीं करा पाया. ब्लड नहीं मिलन के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गयी. उसे रेफर कर दिया गया. मरीज के निधन के पश्चात परिजनों ने क्लीनिक में तोड़फोड़ एवं हंगामा किया. आईएमए व आईडीए की बैठक में कहा गया कि कुछ यूट्यूबर भी घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को और भड़काने की कोशिश की. डॉक्टर पर हमला करने की कोशिश की गयी. आईएमए व आईडीए इस हिंसक घटना की घोर निंदा करती है. चिकित्सकों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार न केवल चिकित्सा सेवाओं के लिए बाधक है. बल्कि समाज के लिए भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. बैठक में आईएमए के अध्यक्ष डॉ. प्रेम शंकर, आईएमए के सचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार, पूर्व सचिव डॉ. प्रेम कुमार, ओम हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. पवन कुमार, भासा के सचिव डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. ऋतुराज, नेत्र सर्जन डॉ. अनुराग कुमार, डॉ. अर्णव आलोक, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अभिषेक जैन, आईडीए के सचिव कुमार देवव्रत, डॉ. जयशंकर, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. जैनेंद्र नाहर, डॉ. एच प्रसाद, डॉ. सुल्तानिया आदि ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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