खगड़िया जेल में कैदी के लिए 32 इंच की टीवी भेजने का दावा, फेसबुक पोस्ट वायरल होने पर अधीक्षक ने कहा- निराधार

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फेसबुक पर मंडलकारा से जुड़ा पोस्ट

फेसबुक पर मंडलकारा से जुड़ा पोस्ट

खगड़िया मंडलकारा में कैदी के लिए 9,500 रुपये की एलईडी टीवी और टाइल्स लगवाने के सोशल मीडिया दावे पर जेल अधीक्षक ने पलटवार किया है. उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. जानिए क्या है पूरा मामला.

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विद्यानंद यादव नामक युवक के फेसबुक अकाउंट से शेयर किए गए इस पोस्ट में दावा किया गया है कि मंडलकारा में अच्छी व्यवस्था नहीं होने के कारण जेल प्रबंधन से बात करके वार्ड में बंद उसके भाई ध्रुव कुमार के लिए 9,500 रुपये की एलईडी टीवी उपलब्ध कराई गई है. इस पोस्ट के साथ टीवी खरीद का बिल और जेल परिसर से बाहर निकलते हुए एक वीडियो भी साझा किया गया है. हालांकि, मंडलकारा अधीक्षक राधेश्याम सुमन ने इन तमाम दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है.

आर्म्स एक्ट के कैदी के लिए टीवी और टाइल्स लगवाने का दावा

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पूरे वाकये को लेकर जेल के भीतर की व्यवस्थाओं पर बहस छिड़ गई है. फेसबुक पोस्ट करने वाले विद्यानंद यादव के अनुसार, अलौली थाना कांड संख्या 220/26 (आर्म्स एक्ट) के मामले में उसका भाई ध्रुव कुमार बीते 29 मई से खगड़िया मंडलकारा में बंद है. मुलाकात के दौरान भाई द्वारा अपनी समस्याएं बताए जाने के बाद, मंगलवार को शहर के बबलू इलेक्ट्रॉनिक्स से 9,500 रुपये में 32 इंच की एलईडी टीवी खरीदकर जेल प्रशासन को सौंपी गई. युवक ने यह भी दावा किया कि वार्ड में भाई की सुविधा के लिए आगे टाइल्स लगाने की भी बात हुई है.

सोशल मीडिया पर उठे सवाल, वायरल बिल की पुष्टि नहीं

इस पोस्ट के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और नेटिजन्स द्वारा जेल मैनुअल के उल्लंघन को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं. वायरल हो रहे कथित बिल में स्पष्ट रूप से खगड़िया मंडलकारा का उल्लेख होने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, वायरल हो रहे इस बिल, वीडियो और फेसबुक पोस्ट की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकी है, और न ही यह स्पष्ट हो पाया है कि संबंधित एलसीडी टीवी वास्तव में जेल के भीतर स्थापित की गई है या नहीं.

जेल मैनुअल के तहत सभी सुविधाएं मौजूद, आरोप बेबुनियाद: अधीक्षक

इस पूरे मामले पर मचे बवाल के बाद जेल प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है और बाहरी इलेक्ट्रॉनिक सामान के प्रवेश की बात को सिरे से नकार दिया है.

"खगड़िया मंडलकारा के सभी वार्डों में सरकार और जेल प्रशासन द्वारा कैदियों के मनोरंजन एवं सूचना के लिए पहले से ही टीवी लगाए गए हैं. जेल मैनुअल के तहत बंदियों के लिए जरूरी सभी मूलभूत सुविधाएं जेल के भीतर सुचारू रूप से उपलब्ध हैं. सोशल मीडिया पर किया जा रहा इस तरह का कोई भी पोस्ट पूरी तरह निराधार और भ्रामक है. जेल प्रशासन की लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति जेल के अंदर कोई सामग्री उपलब्ध नहीं करा सकता है." — राधेश्याम सुमन, जेल अधीक्षक (Superintendent), मंडलकारा खगड़िया


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राजकिशोर सिंह

लेखक के बारे में

By राजकिशोर सिंह

राजकिशोर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के खगड़िया कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति, राजनीति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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