बकरीद को लेकर बकरे की बढ़ी कीमत, सात जून को होगी कुर्बानी
Author Rajkishore singh
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बकरे की बढ़ी कीमत
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गोगरी. ईद-उल अजहा (बकरीद) सात जून को मनाया जायेगा. पर्व को लेकर तैयारी की जा रही है. कुर्बानी के लिए जानवरों की खरीदारी में अकीदतमंद जुट गये हैं. शहर से लेकर गांवों तक कुर्बानी के लिए जानवरों जैसे-खस्सी व बकरा की खरीदारी की जा रही है. नमाज अदा कराने के बाद जानवरों की कुर्बानी की जायेगी. यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, बकरीद महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है. यह पर्व अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और इंसानियत की भावना को दर्शाता है. बीते मंगलवार, 27 मई को सऊदी अरब में मगरीब की नमाज के बाद जुल-हिज्जा का चांद देखा गया, जिसके बाद वहां छह जून को बकरीद मनाये जाने की आधिकारिक घोषणा कर दी गयी. उसके एक दिन बाद यानी सात जून को त्योहार मनाया जाएगा.आठ हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक बिका जानवर
कुर्बानी का जानवर खस्सी का दाम आसमान छू रहा है. आठ हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक में खस्सी की बिक्री हो रही है. कारोबारी के अनुसार, हर साइज व वजन की बकरे की खरीदारी के लिए लोग आ रहे हैं.ऐसे मनाते हैं यह पर्व
बकरीद की शुरुआत ईद की विशेष नमाज से होती हैं, जो सुबह मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की जाती है. इसके बाद लोग गले मिलते हैं. एक दूसरे को पर्व की मुबारकबाद देते हैं. नमाज अदा करने के बाद घर वापस होते हैं. इसके बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो जाता है.बकरीद का पर्व मनाने के पीछे की तारीख
इस पर्व की शुरुआत एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना से जुड़ी है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की आस्था की परीक्षा लेनी चाही. उन्हें अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने का हुक्म दिया. उलेमा के अनुासार, हजरत इब्राहिम के लिए उनका बेटा हजरत इस्माइल सबसे प्रिय थे. अल्लाह के हुक्म को मानते हुए, उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का निर्णय लिया. लेकिन जब लेकिन उन्होंने अपने बेटे के गले पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने एक चमत्कार कर दिया. हजरत इस्माइल की जगह एक जानवर कुर्बान हुआ. इसी घटना की याद में बकरीद की कुर्बानी दी जाती है.कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटना
इस पर्व का उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि समाज में बराबरी, भाईचारे और सेवा की भावना को फैलाना है. कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है- एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों को और तीसरा हिस्सा खुद के उपयोग के लिए रखा जाता है. ये त्योहार गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में भाईचारे और सद्भावना को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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लेखक के बारे में
By राजकिशोर सिंह
राजकिशोर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के खगड़िया कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति, राजनीति की खबरों में रुचि रखते हैं.
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