गोगरी का इनामी नेशनल ठग को राजस्थान पुलिस ने नवगछिया से किया गिरफ्तार, बौरना में की छापेमारी

Updated at : 16 Mar 2026 9:27 PM (IST)
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गोगरी का इनामी नेशनल ठग को राजस्थान पुलिस ने नवगछिया से किया गिरफ्तार, बौरना में की छापेमारी

पुलिस को जैसे ही होटल में ठहरने की भनक लगी तो छापेमारी शुरू कर दी

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राजस्थान के 8500 लोगों से घर बैठे नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रूपये की ठग गिरफ्तार———–

इनामी ठग के पास से 1.88 लाख 500 रुपए नकद, कार, फर्जी आधार कार्ड व ई-श्रम कार्ड बरामद

खगड़िया/गोगरी. राजस्थान पुलिस ने 50 हजार रूपये का इनामी बदमाश गोगरी के ठग को नवगछिया से गिरफ्तार किया है. बताया जाता है कि गोगरी थाना क्षेत्र के बौरना गांव निवासी विजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह का 25 वर्षीय पुत्र कुमार सानू उर्फ दीपक सिंह को नवगछिया स्थित होटल से राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है. बताया जाता है कि ठग दीपक सिंह होटल में पत्नी के साथ जश्न मना रहा था. कई दिनों से इनामी ठग को गिरफ्तार करने के लिए राजस्थान पुलिस रैकी कर रहा था. पुलिस को जैसे ही होटल में ठहरने की भनक लगी तो छापेमारी शुरू कर दी. पुलिस ने इनामी ठग के पास से 1 लाख 88 हजार 500 रुपए नकद, ठगी में इस्तेमाल की गई लाल रंग की कार, फर्जी आधार कार्ड व ई-श्रम कार्ड बरामद किया. पुलिस ने गिरफ्तार इनामी ठग को गोगरी थाना लेकर पहुंचा. जहां से ठग की पहचान कर बौरना गांव में छापेमारी किया. ठग के घर व ठिकाने पर कई घंटे तक छापेमारी व जांच की गयी. राजस्थान पुलिस ने आरोपित को पुनः साथ लेकर थाना पहुंचा. जहां कागजी प्रक्रिया पुरी कर राजस्थान लेकर चला गया.

राजस्थान पुलिस ने ठग दीपक के विरूद्ध 50 हजार रूपये इनाम की थी घोषणा

बताया जाता है कि कोटा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने इससे पहले उसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपये इनाम की घोषणा की थी. कोटा शहर के अनंतपुरा पुलिस स्टेशन में 15 नवंबर 2025 को शिकायतकर्ता कुलदीप शर्मा और कई अन्य लोगों ने ठग दीपक सिंह के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराया था. तब से ठग दीपक सिंह फरार चल रहा था. पुलिस ने बताया कि कांस्टेबल फरसाराम ने आरोपित की पहचान करने और तकनीकी जांच के माध्यम से उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. राजस्थान पुलिस ने एक अंतरराज्यीय जालसाज को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल किया है. जिस पर घर से काम कराने के बहाने हजारों लोगों को ठगने का आरोप है. थाना अधिकारी रमेश कविया के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने पटना से भागलपुर तक गुप्त निगरानी की गयी. डिजिटल निगरानी के माध्यम से उसके ठिकाने की पुष्टि करने के बाद पुलिस ने भागलपुर के नवगछिया स्थित होटल वैभव में छापा मारा. जहां आरोपी अपनी पत्नी के साथ ठहरे हुए थे.

ठगी कर

रातो-रात कार्यालय बंद कर हुआ फरार

बताया जाता है कि ठग दीपक सिंह ने ओएसिस एंटरप्राइजेज नामक एक कंपनी बनाई और घर से काम करने की नौकरियों का वादा करके लोगों को लुभाया. प्रत्येक आवेदक से 2500 रुपये की सुरक्षा जमा राशि एकत्र की. इस प्रकार, उसने कथित तौर पर लगभग 8500 लोगों से लगभग 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. फिर रातोंरात कार्यालय बंद कर दिया और फरार हो गया. मामले की गंभीरता और पीड़ितों की बड़ी संख्या को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिलीप सैनी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया.

फर्जी कंपनी खाेलकर नौकरी दिलाने के नाम पर अखबार में प्रकाशित कराया था विज्ञापन

बताया जाता है कि राजस्थान के अनंतपुरा थानाध्यक्ष रमेश कविया के नेतृत्व में तकनीकी रूप से कुशल पुलिस टीम का गठन किया गया. आरोपित ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था. जिससे जांच और भी चुनौतीपूर्ण हो गयी. पुलिस को पता चला कि आरोपी ने कोटा के सुभाष नगर में एक फर्जी कंपनी खोली थी और अखबारों में आकर्षक नौकरी के विज्ञापन प्रकाशित किए थे. बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को पुस्तक तैयार करने जैसे काम देने के बहाने, आवेदकों से सुरक्षा शुल्क के रूप में 2500 रुपये जमा करने को कहा गया था. घोटाले को फैलाने के लिए ठग दीपक सिंह एक चेन मार्केटिंग मॉडल अपनाया. जिसमें नए सदस्यों की भर्ती करने वाले प्रतिभागियों को 500 रुपये का कमीशन देने की पेशकश की. कुछ ही महीनों के भीतर लोगों से लगभग 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की.

गोगरी का ठग ने कई राज्यों में किया धोखाधड़ी

राजस्थान के कांस्टेबल फरसाराम ने शिकायत के बाद डिजिटल फुट प्रिंट्स और तकनीकी डेटा का गहन विश्लेषण किया. जिससे आरोपित की असली पहचान कुमार सानू के रूप में सामने आयी. तकनीकी जांच से यह भी पता चला कि उसने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की थी.

जांच में पता चला कि आरोपित ने इससे पहले भी दरभंगा (बिहार), रांची (झारखंड), दुर्ग (छत्तीसगढ़), सहारनपुर (उत्तर प्रदेश), बीकानेर (राजस्थान) और इंदौर (मध्य प्रदेश) सहित कई शहरों में करोड़ों रुपये की इसी तरह की धोखाधड़ी की थी. इन मामलों में उसने कथित तौर पर घर से काम करने वाली नौकरियों, जैसे मोती के हार बनाने और स्वेटर बुनने का झांसा देकर लोगों को ठगा था.

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