'हुजूर, मैं जिंदा हूं…' 104 साल के नेत्रहीन बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताया, बंद हो गई पेंशन
उचित मंडल
Gogri Block News: जीवित होने का सबूत देने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटक रहा 104 वर्षीय बुजुर्ग, विभागीय गलती से रिकॉर्ड में हुआ मृत घोषित.
खगड़िया से रणवीर झा की रिपोर्ट
Gogri Block News: सरकारी रिकॉर्ड की एक बड़ी चूक ने खगड़िया जिले के 104 वर्षीय नेत्रहीन बुजुर्ग की जिंदगी मुश्किलों से भर दी है. नगर परिषद गोगरी के बड़ी मलिया निवासी उचित मंडल को विभागीय रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह जीवित हैं. रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उनकी वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई है. अब अपनी पहचान और अधिकार साबित करने के लिए उन्हें सरकारी कार्यालयों और जनकल्याण शिविरों का चक्कर लगाना पड़ रहा है.
मामला तब सामने आया जब उचित मंडल गोगरी प्रखंड परिसर में आयोजित सहयोग सह जनकल्याण शिविर पहुंचे और अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर अपनी समस्या बताई. उनकी शिकायत सुनकर शिविर में मौजूद लोग भी हैरान रह गए.
जिंदा इंसान को रिकॉर्ड में बना दिया मृत
बड़ी मलिया निवासी उचित मंडल ने बताया कि वह कई वर्षों से वृद्धा पेंशन का लाभ ले रहे थे. अचानक उनकी पेंशन बंद हो गई. जांच करने पर पता चला कि विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है. इसके बाद उनकी पेंशन की राशि रोक दी गई.
नेत्रहीन होने के बावजूद वह लगातार सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. उनका कहना है कि वह पूरी तरह जीवित हैं, फिर भी सरकारी कागजों में उन्हें मृत मान लिया गया है.
पेंशन के लिए भटक रहा बुजुर्ग
उचित मंडल का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित कार्यालयों में आवेदन दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. सरकारी रिकॉर्ड की गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वृद्धा पेंशन ही उनके जीवनयापन का प्रमुख सहारा है.
उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद गांव और आसपास के लोग भी मजाक करने लगे हैं. कई लोग उन्हें तंज में “भूत” तक कह देते हैं, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ रही है.
जनकल्याण शिविर से जगी उम्मीद
सहयोग सह जनकल्याण शिविर में आवेदन देने के बाद उचित मंडल को उम्मीद है कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा. उन्होंने अधिकारियों से पेंशन बहाल कराने और रिकॉर्ड में सुधार करने की मांग की है.
क्या बोले बीडीओ?
गोगरी बीडीओ रघुनंदन आनंद ने बताया कि उन्हें इस मामले की पहले जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि यदि मामला पहले सामने आता तो जांच कर कार्रवाई की जाती. अब शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और पात्र लाभुक को न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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