Khagaria: मोबाइल की टॉर्च के सहारे चल रहा गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल, अंधेरे में इलाज और पुलिस कार्रवाई

मोबाईल टॉर्च ली रोशनी मे काम करते पुलिस व स्वास्थ्यकर्मी
शुक्रवार को अस्पताल की बदहाली से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई. वायरल फोटो में अस्पताल परिसर अंधेरे में डूबा दिखाई दे रहा है, जबकि पुलिसकर्मी मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर जरूरी कागजी कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं.
खगड़िया गोगरी से रणवीर झा की रिपोर्ट:
खगड़िया: जिले के गोगरी स्थित मॉडल अनुमंडलीय अस्पताल की स्थिति इन दिनों “दीपक तले अंधेरा” वाली कहावत को सच साबित कर रही है. करोड़ों रुपये की लागत से बने बहुमंजिला भवन और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस यह अस्पताल बुनियादी सुविधा बिजली व्यवस्था के अभाव में खुद बदहाल नजर आ रहा है. हालत यह है कि बिजली कटते ही पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है, और डॉक्टरों से लेकर पुलिसकर्मियों तक को मोबाइल की टॉर्च के सहारे काम करना पड़ रहा है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर
शुक्रवार को अस्पताल की बदहाली से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई. वायरल फोटो में अस्पताल परिसर अंधेरे में डूबा दिखाई दे रहा है, जबकि पुलिसकर्मी मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर जरूरी कागजी कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, पसराहा थाना क्षेत्र में एनएच-31 पर शुक्रवार दोपहर सड़क दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया. घायल को इलाज के लिए गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया था. मामले की जांच और परिजनों का बयान दर्ज करने के लिए पसराहा और गोगरी थाना की पुलिस अस्पताल पहुंची. इसी दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो गई, जिसके बाद एक पुलिस पदाधिकारी ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर दूसरे अधिकारी को रोशनी दी. टॉर्च की रोशनी में ही पुलिस ने परिजनों का बयान अपनी डायरी में दर्ज किया.
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा
मामले को लेकर जब प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि संभवतः उस समय बिजली चली गई होगी. उन्होंने बताया कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से जानकारी लेने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी.
सवालों के घेरे में व्यवस्था
गोगरी का अनुमंडलीय अस्पताल इलाके का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. इसके बावजूद बिजली जैसी मूलभूत सुविधा की ऐसी स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में वैकल्पिक बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों और कर्मियों को परेशानी का सामना न करना पड़े.
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By Shruti Kumari
श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।
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