चार की जगह 40 ठेला लगवा रहे ठेकेदार
Updated at : 28 May 2017 5:39 AM (IST)
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अनदेखी. खगड़िया रेलवे स्टेशन पर रेलवे कर्मियों के सामने रोज टूट रहे रेलवे के कानून खगड़िया रेलवे स्टेशन पर लाइसेंसी ठेकेदारों की आड़ में खुलेआम अवैध वेंडरिंग का काला कारोबार चल रहा है. स्थिति यह है कि प्लेटफाॅर्म पर प्रति दो मीटर पर एक अवैध रूप से ठेला पर सामान की बिक्री हो रही है. […]
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अनदेखी. खगड़िया रेलवे स्टेशन पर रेलवे कर्मियों के सामने रोज टूट रहे रेलवे के कानून
खगड़िया रेलवे स्टेशन पर लाइसेंसी ठेकेदारों की आड़ में खुलेआम अवैध वेंडरिंग का काला कारोबार चल रहा है. स्थिति यह है कि प्लेटफाॅर्म पर प्रति दो मीटर पर एक अवैध रूप से ठेला पर सामान की बिक्री हो रही है. रेल अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.
खगड़िया : रेलवे स्टेशन पर लाइसेंसी वेंडर की आड़ में खुलेआम अवैध वेंडरों के काला कारोबार फल-फूल रहा है. स्थिति यह है कि जिस लाइसेंसी ठेकेदार को चार स्टॉल/ठेला लगाने की इजाजत है
वह स्थानीय रेल अधिकारियों को मैनेज कर 40 ठेला/खोमचा लगवा रहे हैं. जिनसे प्रत्येक दिन से होने वाली वसूली महीने में लाखों रुपये तक जा पहुंची है. बताया जाता है कि रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडिंग के काले कारोबार को मैनेज करने के लिये अलग अलग टेबल पर कुल एक लाख दस हजार रुपये प्रति महीने चढ़ावा के तौर पर देना होता है. तब जाकर रेलवे स्टेशन पर बेहिचक होकर अवैध वेंडरों की दुकान लग रही है.
हालांकि खगड़िया रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट प्रभारी पंकज कुमार यादव रेलवे स्टेशन व प्लेटफॉर्म पर अवैध वेंडरों के रहने से इनकार करते हुए कहा कि अवैध वेंडरों के खिलाफ धरपकड़ अभियान चलाया जा रहा है. रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरों से मुक्त कराने तक अभियान जारी रहेगा. इधर, रेलवे स्टेशन के चारों लाइसेंसी ठेकेदारों के प्रतिनिधि ने अवैध वेंडरों को बढ़ावा देने के आरोप को बेबुनियाद बताया है.
लाइसेंसी ठेकेदारों द्वारा निर्धारित संख्या से कई गुना ज्यादा ठेला लगवा कर वसूले जा रहे लाखों रुपये
रेलवे स्टेशन पर हर दो मीटर की दूरी पर एक ठेला लगा बिक रहे सामान, खोमचा वालों से पटा प्लेटफाॅर्म
अवैध वेंडरों की मनमानी से रेलयात्रियों की परेशानी बढ़ी, प्लेटफाॅर्म पर हर ओर अवैध वेंडरों का बोलबाला
रेल नीर की जगह खगड़िया रेलवे स्टेशन पर बिक रहा लोकल मेड पानी, गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं
खगड़िया रेलवे स्टेशन पर वेंडरों का काला सच
1. एसएन प्रसाद : लाइसेंसी ठेकेदार
नियमत : चार स्टॉल व दो ठेला लगाने की इजाजत लेकिन लगा रहे सात मोरब्बा का सात ठेला व पांच खोमचा, प्रत्येक ठेला से 300 रुपये रोज व एक खोमचा वालों को 60 रुपये प्रतिदिन का देना होता है किराया
2. आरसी यादव (लाइसेंसी ठेकेदार)
नियमत : एक फल का स्टॉल व एक ठेला लगाना है. लेकिन इनके नाम पर सात ठेला व 20 खोमचा वाले खगड़िया स्टेशन पर अपना अवैध धंधा कर रहे हैं.
अनाधिकृत एक फल के ठेला से 300 रुपये प्रतिदिन, 60 रुपये प्रतिदिन प्रत्येक खोमचा वालों को ठेकेदार/प्रतिनिधि को चुकाना होता है.
3. गुंजरी देवी (वेंडिंग ठेकेदार)
नियमत : एक भोजनालय, एक कैंटीन, एक स्टॉल लगाना है. लेकिन रेल अधिकारियों की मिलीभगत से इस ठेकेदार के नाम पर दो शृंगार ठेला, सात मोरब्बा सहित अन्य सामग्री का ठेला, केतली चाय वेंडर, मछली, रोटी खोमचा वाले 60 वेंडर स्टेशन व ट्रेनों पर अवैध रूप से बिक्री कर रहे हैं.
अनाधिकृत शृंगार ठेला 300 रुपये रोज व खाद्य सहित अन्य सामग्री के प्रत्येक ठेला संचालक से 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से तथा 60 रुपये प्रति खोमचा वालों को प्रतिदिन के हिसाब से ठेकेदार को देना होता है.
4. राम विलास महतो (लाइसेंसी ठेकेदार)
नियमत : दो ठेला लगाना है.
लेकिन अनाधिकृत रूप से खगड़िया रेलवे स्टेशन पर इस ठेकेदार के नाम पर पांच ठेला व 20 चना, मुढ़ी का खोमचा लगाया जा रहा है. प्रत्येक ठेला संचालक से 200 रुपये रोज व खोमचा वालों से 60 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से राशि से वसूली जाती है.
स्टेशन सहित ट्रेनों में अवैध वेंडरों के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाया जायेगा. अगर कोई लाइसेंसी ठेकेदार निर्धारित संख्या से ज्यादा स्टॉल लगाने के दोषी पाये गये तो उन पर भी कड़ी कार्रवाई की जायेगी. साथ ही ऐसे अवैध कारोबार को प्रश्रय देने वाले रेल अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जायेगा.
अतुल्य सिन्हा, डीआरएम, सोनुपर रेल मंडल.
प्रत्येक महीने दस लाख रुपये तक अवैध वसूली
बताया जाता है कि रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरों के काले कारोबार से प्रत्येक महीने वसूली जाने वाली रकम दस लाख रुपये तक जा पहुंची है. प्रत्येक दिन होने वाली वसूली में दुकान के हिसाब से रेट तय है. प्रत्येक खोमचा वालों से 60 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराया वसूला जाता है. सूत्रों की मानें तो छह दर्जन से अधिक खोमचा वाले खगड़िया रेलवे स्टेशन पर अपनी दुकान लगाते हैं. इसी तरह मोरब्बा का ठेला लगाने के लिये प्रत्येक ठेला प्रतिदिन 200 से 300 रुपये की वसूली की जाती है.
इसी तरह केतली चाय, मछली रोटी खोमचा वालों को प्रतिदिन के हिसाब से तय रकम ठेकेदार या उनके प्रतिनिधि को देना होता है. इसमें से चढ़ावा की रकम चुकाने के बाद बाकी रकम जेब में जा रही है. इतना ही नहीं स्टॉल या ठेला पर रेल नीर की जगह लोकल मेड बोतलबंद पानी की खुलेआम बिक्री हो रही है. जिसकी बिक्री की इजाजत रेल प्रशासन ने नहीं दिया है. लेकिन वेंडरों व स्टॉल संचालक की मनमानी के कारण रेल यात्रियों को गुणवताविहीन बोतलबंद पानी का सेवन करना पड़ रहा है.
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