आवेदन देकर बच्चे को ले सकते हैं गोद

Updated at : 12 May 2017 4:05 AM (IST)
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आवेदन देकर बच्चे को ले सकते हैं गोद

पैरा लीगल वोलेंटियर को दिया गया प्रशिक्षण कार्यशाला में दत्तक ग्रहण दिशा निर्देश 2017, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, घरेलू हिंसा प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी उपस्थित पैरा लीगल वोलेंटियर को दी गयी. खगड़िया : व्यवहार न्यायालय स्थित मध्यस्थता केंद्र में गुरुवार को पैरा लीगल वालेंटियर के क्षमता संबर्द्धन के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिला […]

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पैरा लीगल वोलेंटियर को दिया गया प्रशिक्षण

कार्यशाला में दत्तक ग्रहण दिशा निर्देश 2017, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, घरेलू हिंसा प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी उपस्थित पैरा लीगल वोलेंटियर को दी गयी.
खगड़िया : व्यवहार न्यायालय स्थित मध्यस्थता केंद्र में गुरुवार को पैरा लीगल वालेंटियर के क्षमता संबर्द्धन के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में दत्तक ग्रहण दिशा निर्देश 2017, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, घरेलू हिंसा प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी उपस्थित पैरा लीगल वालेंटियर को दी गयी.
मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव न्यायिक प्राधिकार धीरज कुमार भास्कर ने उपस्थित प्रतिभागी को दत्तक ग्रहण दिशा निर्देश 2017 के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कहीं भी कोई परित्यक्त, अनाथ बच्ची किसी भी व्यक्ति को प्राप्त होता है तो इसकी सूचना तुरंत निकटम थाना अथवा चाइल्ड लाइन या जिला बाल संरक्षण इकाई को देना चाहिए. वहां से बच्चों को बाल कल्याण समिति पहुंचाया जाता है.
जहां दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित किया जाता है. फिर इच्छुक पात्र व्यक्ति उस बच्चे को प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. दत्तक ग्रहण करने के लिए दत्तक ग्रहण एजेंसी के पास आवेदन देना चाहिए. जहां से सक्षम न्यायालय में आवेदन दाखिल कर बच्चे को गोद ले सकते हैं.
इसी प्रकार समाज कल्याण विभाग के सहायक निर्देशक जिला बाल संरक्षण इकाई बासुदेव कुमार कश्यम ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, बच्चों की कल्याणकारी योजना परवरिश योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी से प्रतिभागियों को अवगत कराया. बोले, समाज कल्याण विभाग के विभिन्न योजनाओं में सबसे लोकप्रिय योजना परवरिश योजना है. इस योजना का लाभ जिले में करीब 300 बच्चे को मिल रहा है. जिनके माता पिता नहीं हैं. वैसे बच्चे इसके पात्र होते हैं. उन्हें 18 वर्ष तक पढ़ने लिखने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. वहीं, महिला हेल्प लाइन के प्रोजेक्ट मैनेजर रूबी सीमा ने पीड़ित महिलाओं की सहायता के संबंध में जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि जो महिला पति या परिवार से प्रताड़ित है, वे महिला हेल्प लाइन से सहायता ले सकती हैं. जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने बाल कल्याण समिति की भूमिका पर विस्तार से उपस्थित प्रतिभागियों को जानकारी दी.
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