अस्पतालों में खल रही डॉक्टरों की कमी
Updated at : 07 May 2017 6:51 AM (IST)
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अनदेखी. आधे से अधिक चिकित्सक ड्यूटी कम निजी क्लिनिकों पर मरीजों का करते हैं इलाज सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की भारी कमी है. जिसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है़ खगड़िया : जिले के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ […]
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अनदेखी. आधे से अधिक चिकित्सक ड्यूटी कम निजी क्लिनिकों पर मरीजों का करते हैं इलाज
सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की भारी कमी है. जिसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है़
खगड़िया : जिले के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है. सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी चिकित्सकों की भारी कमी है. जिसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है़ पद स्थापित आधे से अधिक चिकित्सक अस्पताल में ड्यूटी कम निजी क्लिनिक पर मरीजों को इलाज करते देखे जा रहे हैं. यहीं कारण सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर रेफर करने की परंपरा बनी हुयी है.
अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक जिस मरीज को रेफर करते हैं उसी मरीज का इलाज अपने क्लिनिक में आसानी करते हैं. सदर अस्पताल के आसपास कई ऐसे निजी अस्पताल खुल गये हैं. दिन प्रतिदिन खोले जा रहे अस्पताल में न तो मानक का ख्याल रखा गया है और न ही एक भी प्रशिक्षित कर्मी हैं. मरीज बच गया तो क्लिनिक के भरोसे मर गया तो मरीज की स्थिति खराब थी. जिसे देखने की फुरसत स्वास्थ्य प्रशासन को नहीं है.
सुविधाओं का है अभाव
रेफरल अस्पताल में इलाज कराने के लिए मरीज मीलों दूर तय कर पहुंचते हैं, लेकिन यहां पर डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है. सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए योजना चलायी है मां तुझे सलाम, जिसके तहत प्रसव के लिए आने वाली महिला को कई प्रकार की सुविधाएं दी जाती है,
लेकिन अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिला को भागलपुर या फिर बेगूसराय रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है. अस्पताल में मौजूदा समय में न तो कोई फिजिशियन है, न ही इएनटी विशेषज्ञ. हड्डियों का डॉक्टर, आंखों का डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ के साथ अन्य 12 पदों में से मात्र दो ही सहायक सर्जन काम कर रहे हैं. अन्य के पद खाली पड़े हुए हैं. इसके अलावा 12 सफाई कर्मचारियों की जगह एक सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं.
बीमार है अस्पताल
रेफरल अस्पताल खुद बीमार बना है. यहां गंदगी के बीच मरीजों को इलाज करवाने की मजबूरी बनी हुई है. रेफरल अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों की कमी है. जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतनी पड़ रही है. अस्पताल में मात्र दो डॉक्टर हैं. जिसमें एक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर चंद्रप्रकाश व दूसरा चिकित्सा पदाधिकारी अरुण कुमार सिन्हा के भरोसे प्रतिदिन 500 मरीज का इलाज किया जा रहा है. एक महिला चिकित्सक डॉ मंजू कुमारी का स्थानांतरण सदर अस्पताल कर दिया गया.
इसके बाद रेफरल अस्पताल में एक महिला चिकित्सक शोभा रानी है. यहां आने वाले मरीज को उसी समय भागलपुर या फिर बेगूसराय रेफर कर दिया जाता है.
जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवा का ब्योरा
सदर अस्पताल 1
रेफरल अस्पताल 2
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 7
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 25
स्वास्थ्य उपकेन्द्र 193
किस प्रखंड में कितने उपस्वास्थ्य केंद्र
खगड़िया प्रखंड- 37, गोगरी प्रखंड- 34, अलौली प्रखंड- 37, परबत्ता प्रखंड- 25, मानसी प्रखंड- 11
चौथम प्रखंड- 24,बेलदौर प्रखंड- 25
स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर करोड़ों हो रहा है खर्च
जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा प्रति माह करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि आज तक सरकारी अस्पताल में एक भी ऐसे मरीज का इलाज नहीं किया गया है जिसे उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत किया जा सके. गंभीर मरीज सदर अस्पताल आते हैं लेकिन उचित इलाज के अभाव में बाहर चले जाते हैं. कागजों पर अस्पताल की रिपोर्टिंग करने की परंपरा वर्षों से चला आ रहा है. वही स्थिति कमोबेश अभी भी बनी हुयी है.
कहते हैं पदाधिकारी
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर चंद्रप्रकाश सारा काम मुश्किल से करना पड़ रहा है. अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के साथ अन्य कर्मचारियों की भी कमी है. इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक समस्या को दूर करने के लिए उचित कदम नहीं उठाये गये हैं.
डॉक्टर चंद्रप्रकाश, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
चकाचक दिख रहा है अस्पताल
व्यवस्था में सुधार के नाम पर चकाचक अस्पताल दिखने लगा है. लेकिन चिकित्सीय उपकरण का उपयोग करने वाला कोई नहीं है. ऐसे कई उपकरण अस्पताल में पड़ा हुआ है. जो देख रेख के अभाव में खराब हो रहा है.जिले में सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एसएनसीयू लगाया गया था. जहां प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को रखा जाता था. ताकि जन्म मृत्यु दर को कम किया जा सके. लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चाइल्ड केयर यूनिट बेकार साबित हो रहा है.
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