नगर के वोटर लिस्ट में नाम है, तो किसी भी वार्ड के बन सकते हैं प्रत्याशी

Updated at : 06 Apr 2017 5:44 AM (IST)
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नगर के वोटर लिस्ट में नाम है, तो किसी भी वार्ड के बन सकते हैं प्रत्याशी

गोगरी : नगर के किसी भी वार्ड के मतदाता हैं, तो निकाय चुनाव में किसी भी वार्ड से प्रत्याशी बन सकते हैं. प्रत्याशी बनने के लिए इस बात का ख्याल रखना होगा कि जिस वार्ड से आप प्रत्याशी बनना चाहते हैं वह वार्ड या तो आपकी कोटि के लिए आरक्षित होना चाहिए या फिर ऐसी […]

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गोगरी : नगर के किसी भी वार्ड के मतदाता हैं, तो निकाय चुनाव में किसी भी वार्ड से प्रत्याशी बन सकते हैं. प्रत्याशी बनने के लिए इस बात का ख्याल रखना होगा कि जिस वार्ड से आप प्रत्याशी बनना चाहते हैं वह वार्ड या तो आपकी कोटि के लिए आरक्षित होना चाहिए या फिर ऐसी जाति के लिए आरक्षित होना चाहिए जिस जाति से आप भी प्रत्याशी बन कर चुनाव लड़ सकते हैं.

सरकार से मानदेय लेनेवाले नहीं होंगे प्रत्याशी: नगर निकाय चुनाव में वैसे व्यक्ति प्रत्याशी की भूमिका नहीं निभा सकते हैं, जो या तो सरकार से वेतन लेते हैं या फिर मानदेय के रूप में राशि लेते हैं. वैसे सभी कर्मियों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा निकाय चुनाव में प्रत्याशी बनने पर पाबंदी लगा दी गयी है. खास कर आंगनबाड़ी सेविका सहायिका, नियोजित शिक्षक, इंदिरा आवास, मनरेगा, सर्वशिक्षा, साक्षरता, न्याय मित्र, विकास मित्र, शिक्षा मित्र के साथ-–साथ स्थानीय प्राधिकार के द्वारा नियोजित कर्मी भी नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशी नहीं बन सकते हैं. साथ ही साथ शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यरत कर्मी, प्रोफेसर, शिक्षकेतर कर्मचारी, गृहरक्षक, सरकारी वकील आदि के अलावा दलपति को भी प्रत्याशी बनने पर पाबंदी रहेगी.
क्या है नियम: बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के मुताबिक अगर किसी नागरिक को 4 अप्रैल, 2008 के बाद तीसरा, चौथा या इससे अधिक संतानें हुई हैं, तो वह नगरपालिका निर्वाचन में अभ्यर्थी नहीं हो सकता है. चुनाव लड़ने के लिए उन्हें अधिकतम दो संतान ही होने चाहिए. अगर एक ही बार में जुड़वां या इससे ज्यादा संतान होने से संतानों की संख्या बढ़ी है, तो यह नियम उन पर लागू नहीं होगा.
कहते हैं एसडीओ: एसडीओ संतोष कुमार ने कहा कि तीसरे या उससे अधिक बच्चे को गोद देने से कोई चुनाव लड़ने की योग्यता प्राप्त नहीं कर सकता. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि गोद देने की प्रक्रिया चाहे कानूनन क्यों न हो. गोद देने के बाद भी कानूनी रूप से वह उस बच्चे का पिता होता है. जिनका भी 4 अप्रैल, 2008 के बाद तीसरी संतान को जन्म दिया है वह चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.
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