गंदगी फैलायी, तो लगेगा जुर्माना

Updated at : 01 Dec 2016 6:34 AM (IST)
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गंदगी फैलायी, तो लगेगा जुर्माना

खगड़िया : मानसी पीएचसी प्रभारी पर महिला चिकित्सक द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच के लिये गठित टीम में फेरबदल किया जायेगा. प्रभात खबर में जांच टीम पर उठ रहे सवाल के संदर्भ में प्रकाशित खबर पर एक्शन लेते हुए डीएम जय सिंह ने सिविल सर्जन को जांच टीम में एक महिला अधिकारी को शामिल […]

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खगड़िया : मानसी पीएचसी प्रभारी पर महिला चिकित्सक द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच के लिये गठित टीम में फेरबदल किया जायेगा. प्रभात खबर में जांच टीम पर उठ रहे सवाल के संदर्भ में प्रकाशित खबर पर एक्शन लेते हुए डीएम जय सिंह ने सिविल सर्जन को जांच टीम में एक महिला अधिकारी को शामिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही आरोप के घेरे में आये मानसी पीएचसी प्रभारी से जांच टीम में शामिल एक अधिकारी डॉ. केएम प्रसाद की नजदीकी की चर्चा भी जोर-शोर है.

ऐसे में जांच रिपोर्ट पर सवालिया निशान खड़ा होने की आशंका को देखते हुए डॉ केएम प्रसाद को टीम से हटा कर दूसरे अधिकारी को शामिल किया जा सकता है. इधर, जांच के लिये गठित जांच टीम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक संबंधित महिला चिकित्सक से पूछताछ तक नहीं की जा सकी है. हां, दिखाने के लिये जांच टीम मानसी पीएचसी जरूर पहुंची थी.

जांच के नाम पर खानापूर्ति पर डीएम सख्त : मानसी पीएचसी प्रभारी व महिला चिकित्सक प्रकरण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के नाम पर खानापूर्ति की खबर पर डीएम ने सख्त रुख अपनाया है. जांच टीम पर सवाल उठने के बाद डीएम ने सिविल सर्जन को जांच टीम में एक महिला अधिकारी को शामिल करने को कहा है. परंपरा के अनुसार महिला कर्मियों के उत्पीड़न सहित प्रताड़ना की जांच के लिये गठित की जाने वाली टीम में कम से कम से एक महिला सदस्य को रखा जाता रहा है लेकिन खगड़िया स्वास्थ्य विभाग का रवैया कुछ और ही इशारे कर रहे हैं.
आखिर महिला चिकित्सक के लैंगिक उत्पीड़न सहित अन्य प्रताड़ना के आरोपों के लिये गठित जांच टीम में किसी महिला अधिकारी को क्यों नहीं रखा गया? जांच टीम के सामने महिला चिकित्सक कैसे उनके सवालों का जवाब सहज ढंग से दे पायेगी? आखिर महिला चिकित्सक के प्रताड़ना जैसे गंभीर मामलों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा टालमटोल वाले रवैये के पीछे क्या राज हैं? इधर, पूरे मामले में डीएम के कड़े रुख से सच सामने आने की उम्मीद है.
कार्यस्थल पर महिलाकर्मी की सुरक्षा बनी चुनौती : पूरा मामला मीडिया में आने के बाद भले ही जांच टीम गठित कर दिया गया हो लेकिन अब तक के घटनाक्रम के बीच बड़ा सवाल यह है कि जब महिला चिकित्सक एक महीना पूर्व ही अपने साथ हो रहे उत्पीड़न की जानकारी सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंच कर दी तो उस वक्त मामले को क्यों दबा दिया गया? सरकारी अस्पताल में तैनात महिला चिकित्सक ही जब सुरक्षित नहीं है तो छोटे पद पर कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ इस तरह की अनैतिक हरकत नहीं होती होगी इसकी क्या गारंटी है? इधर, इस मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी भी प्राइवेट या सरकारी कार्यालय में महिला कर्मी को उत्पीड़न से बचाने के लिये 2013 में पारित कानून के तहत अब तक इस मामले को आंतरिक समिति में नहीं भेजा गया है.
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