जीएन बांध में रिसाव से अफरा-तफरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Aug 2016 6:13 AM (IST)
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परेशानी. फ्लड फाइटिंग की कार्रवाई जोरों पर, सुरक्षित पंचायतों को बचाने की कवायद सुबह पांच बजे देवरी पंचायत के अररिया गांव के ठाकुरबाड़ी के निकट गंगा की पुरानी धारा माने जाने वाले स्थान पर जीएन बांध से करीब तीन सौ फीट दूर धरती से अचानक पानी निकलने लगा. जिसकाे लेकर आसपास के लोगों के बीच […]
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परेशानी. फ्लड फाइटिंग की कार्रवाई जोरों पर, सुरक्षित पंचायतों को बचाने की कवायद
सुबह पांच बजे देवरी पंचायत के अररिया गांव के ठाकुरबाड़ी के निकट गंगा की पुरानी धारा माने जाने वाले स्थान पर जीएन बांध से करीब तीन सौ फीट दूर धरती से अचानक पानी निकलने लगा. जिसकाे लेकर आसपास के लोगों के बीच अफरा तफरी का माहौल बन गया.
परबत्ता : प्रखंड में बाढ़ के खतरे से अब तक सुरक्षित बच गये पंचायतों पर से भी बाढ़ का खतरा अभी तक टला नहीं है. प्रशासन को एक तरफ बाढ़ की परेशानी से जूझ रहे पंचायतों में राहत एवं बचाव कार्य को संचालित करने की जिम्मेवारी है. वहीं दूसरी तरफ बाढ़ से सुरक्षित पंचायतों को इसके प्रकोप से बचाये रखने की भी जद्दोजहद चल रही है. इस कड़ी में बुधवार शाम सियादतपुर अगुवानी पंचायत के खनुआ राका गांव के निकट जीएन बांध में रिसाव होने की खबर आयी तो प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए देर रात तक में इसे बंद किया.
गंगा की पुरानी धारा में रिसाव शुरू : सुबह पांच बजे देवरी पंचायत के अररिया गांव के ठाकुरबाड़ी के निकट गंगा की पुरानी धारा माने जाने वाले स्थान पर जीएन बांध से करीब तीन सौ फीट दूर धरती से अचानक पानी निकलने लगा. ऐसा माना जाता है कि जीएन बांध के बनने से दशकों पूर्व गंगा नदी अररिया गांव के निकट से प्रवाहित होती थी जो कालांतर में खिसकते हुए अगुवानी तक चली गयी.
इस स्थान की भौगोलिक बनावट को देखते हुए भी यह स्पष्ट प्रतीत होता है. अभी भी यह धारा अररिया, कुढा धार, बिठला, कुल्हरिया तथा सलारपुर होते हुए गंगा में मिल जाती है. इस धारा में रिसाव होने की सूचना पाकर ग्रामीणों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इसे बंद करने का उपक्रम शुरू कर दिया. ग्रामीणों द्वारा करीब डेढ़ सौ बोरों में मिट्टी भरकर इस छेद में दिया गया.लेकिन जलस्राव बंद होने की बजाय और भी बढ गया.
ग्रामीणों के स्तर से किये जा रहे इस बचाव कार्य का कोई साकारात्मक फलाफल नहीं निकलता देख जल संसाधन विभाग को सूचना दी गयी. विभाग के अधिकारियों तथा कर्मियों ने गुरुवार सुबह दस बजे से मोर्चा संभाला और कुछ ही घंटों में इस जलस्राव पर काबू करने में सफलता मिल गयी. लेकिन थोड़ी ही देर में बगल में एक अन्य स्थान से पानी रिसने लगा. इस रिसाव की स्थिति को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने इसे बंद करने के लिये पूरी ताकत झोंक दिया. समाचार प्रेषण तक इसे बंद करने के लिये युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है
कि बुधवार शाम को आये भूकंप के कारण यह रिसाव शुरू हुआ जो सुबह तक बढ़ते बढ़ते खतरनाक रूप धारण करने लगा. ग्रामीण इसके पीछे यह तर्क दे रहे हैं कि पूर्व में भी गंगा का जलस्तर बढ़ा था लेकिन इससे पहले कभी भी पुरानी धारा में रिसाव नहीं हुआ था. अररिया गांव तथा इलाके के लोग इस रिसाव से काफी चिंतित हैं.
इसके पीछे का वजह यह है कि यदि किसी भी वजह से जीएन बांध को पश्चिम की तरफ से कोई क्षति होती है तो कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. जल संसाधन विभाग के लोग स्थिति की गंभीरता को समझते हुए काफी सजगता से लगे हुए हैं. वहीं रिसाव की सूचना मिलते ही अररिया गांव में दिन भर हजारों लोगों का तांता लगा रहा.
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