सामाजिक दबाव में गुम हुई मासूम की चीख

Published at :29 Jul 2016 7:23 AM (IST)
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सामाजिक दबाव में गुम हुई मासूम की चीख

अनदेखी. नहीं मिला मुआवजा, पीड़ित बच्ची के परिजनों की चुप्पी से पुलिस मजबूर मोरकाही थाना क्षेत्र के माड़र दक्षिणी पंचायत की एक पांच वर्षीया बच्ची के साथ पड़ोस में ही रहने वाले गिरमल शर्मा उर्फ गिरना ने बीते 15 जुलाई को दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था. इस मामले में पंचायत कर एक लाख […]

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अनदेखी. नहीं मिला मुआवजा, पीड़ित बच्ची के परिजनों की चुप्पी से पुलिस मजबूर

मोरकाही थाना क्षेत्र के माड़र दक्षिणी पंचायत की एक पांच वर्षीया बच्ची के साथ पड़ोस में ही रहने वाले गिरमल शर्मा उर्फ गिरना ने बीते 15 जुलाई को दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था. इस मामले में पंचायत कर एक लाख में मासूम की आबरू का सौदा हुआ, जो 24 जुलाई तक पैसा देने की बात पंचायत ने कही थी, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला.
खगड़िया : सामाजिक दबाव के आगे मासूम की चीख दब कर रह गयी. माड़र दक्षिण पंचायत के इस मार्मिक घटना के बाद आरोपी को सजा दिलाने की बजाय समाज के ठेकेदार उसे बचाने में लगे हैं. पुलिस भी लाचार हैं. पीड़ित पक्ष की शिकायत नहीं करने से पुलिस चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही है. इधर, सामाजिक दबाव के आगे परिजन की सिसकियां भी बंद कमरे में दम तोड़ रही है.
एक लाख में मासूम की आबरू का सौदा :
मोरकाही थाना क्षेत्र के माड़र दक्षिणी पंचायत निवासी पीड़ित बच्ची की मां के अनुसार घटना 15 जुलाई की है. जिसमें उसकी पांच वर्षीय बच्ची के साथ पड़ोस में ही रहने वाले गिरमल शर्मा उर्फ गिरना ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया है. बच्ची के रोने की आवाज सुनने पर पहुंची मां ने गलत व्यवहार करते देख हो हल्ला करना शुरू किया तो लड़का भाग गया. घटना के कारण बच्ची का पेशाब बंद होने के बाद उसे सदर अस्पताल में भरती करवाया गया,
जहां बच्ची का इलाज कर रहे चिकित्सकों को पीड़ित बच्ची की मां द्वारा घटनाा की जानकारी देने के बाद भी पुलिस को सूचना नहीं दी गयी. बच्ची का इलाज कर घर भेज दिया गया. घटना की जानकारी मुखिया, सरपंच सहित ग्रामीणों को घटना की जानकारी देने पर 18 जुलाई को माड़र दक्षिणी काली स्थान में हुई पंचायती में एक लाख रुपये पीड़ित लड़की के परिजन को देने का फरमान सुनाते हुए दुष्कर्म जैसे संगीन मामले को रफा-दफा कर दिया गया.
पंचायती में शामिल लोगों पर पुलिस की नजर : दुष्कर्म की पंचायती कर मामला रफा-दफा करने का मामला मीडिया में तूल पकड़ने के बाद मोरकाही पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए पीड़ित बच्ची के परिजन को थाने पर बुलाया था, लेकिन सामाजिक दबाव के आगे बेबस पीड़ित बच्ची के परिजनों ने पुलिस को किसी भी प्रकार की शिकायत करने से इनकार कर दिया. पंचायती में सरपंच पति महेन्द्र शर्मा, सोनू शर्मा, सुरेन्द्र कुमार, प्रकाश शर्मा, फुलचन्द्र शर्मा, लूड़ी शर्मा, गंगा शर्मा, विलो शर्मा, शंभु शर्मा, श्रवण शर्मा, अशोक शर्मा, संतपाल शर्मा, उपेन्द्र शर्मा, भारत शर्मा, मनोज शर्मा, सिकेंद्र शर्मा आदि सहित सैकड़ों लोगों की
मौजूदगी में हुई पंचायती में दुष्कर्म के मामले को रफा-दफा करने की घटना हुई है. ऐसे लोगों पर पुलिस की पैनी नजर है. आने वाले दिनों में अगर पीड़ित पक्ष शिकायत करते हैं तो पंचायती में शामिल लोगों पर शिकंजा कसा जा सकता है.
पीड़ित के परिजन को अब तक नहीं मिली रकम
पंचायती के फरमान के अनुसार 24 जुलाई तक आरोपी पक्ष को तय रकम एक लाख रुपये पीड़ित पक्ष को नहीं देने पर आरोपी पक्ष को घर-द्वार सहित मवेशी तक खाली करना था. आरोपी लड़का व उसके माता-पिता से यह लिखित रूप से लिया गया. जानकारी के अनुसार पंचायती के अनूठे फैसले के अनुसार तय रकम अब तक पीड़ित के परिजन को नहीं दिये गये हैं. इधर, पुलिस की सख्ती बाद ग्रामीण फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं. कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है. सूत्रों की मानें तो पूरे मामले में अबतक के घटनाक्रम को देखते हुए गुप्त पंचायती की तैयारी की जा रही है.
घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित बच्ची के परिजन को थाने पर बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने कोई शिकायत करने से इनकार कर दिया. ऐसे में पुलिस क्या कर सकती है. दुष्कर्म जैसे मामलों में स्थानीय स्तर पर पंचायती करना गैरकानूनी है.
महेश कुमार, मोरकाही थानाध्यक्ष.
बच्ची के रोने की आवाज आयी तो वह घर के अंदर देखने पहुंची, जहां पड़ोस के ही गिरमल कुमार उर्फ गिरना मेरी बेटी के साथ गलत (दुष्कर्म) कर रहा था. यह देख वह हो-हल्ला करने लगी तो आरोपी भाग गया. घटना के कारण बच्ची का पेशाब बंद हो जाने के बाद उसे सदर अस्पताल में भरती कराना पड़ा. बाद में काली स्थान में हुई पंचायती में मामला रफा-दफा कर दिया गया. पंचायती के अनुसार एक लाख रुपये आरोपी को देने का फरमान सुनाया गया, लेकिन पैसे अभी तक नहीं मिला है.
पीड़ित बच्ची की मां.
घटना बाद गांव के ही काली स्थान में हुई पंचायती में आरोपी लड़का के परिजन को एक लाख रुपये मुआवजा के रूप में पीड़ित बच्ची के परिजन को देने का फैसला सुनाया गया था. पंचों व ग्रामीणों की मौजूदगी में फैसला स्वीकार करते हुए आरोपी लड़का व उनके माता-पिता ने तय समय सीमा के अंदर रुपये नहीं देने पर घर-द्वार खाली करने की सहमति लिखित रूप से दी थी. आगे क्या हुआ वह नहीं बता सकते हैं.
महेेंद्र शर्मा, सरपंच पति, माड़र दक्षिणी पंचायत.
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