देसी चिकित्सालय : कागज पर ही इलाज दिन के 12 बजे के बाद नहीं मिलते हैं कोई कर्मी

Published at :24 Jun 2016 6:22 AM (IST)
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देसी चिकित्सालय : कागज पर ही इलाज दिन के 12 बजे के बाद नहीं मिलते हैं कोई कर्मी

अधिकतर लोगों को पता भी नहीं कि सन्हौली में चल रहा है औषधालय संयुक्त औषधालय में आयुर्वेद, होमियोपैथिक, यूनानी पद्धति से होना है इलाज दवा का पता नहीं, लेकिन मरीजों के इलाज की हो रहा दावा घर बैठे अधिकतर कर्मी उठा रहे वेतन प्रति वर्ष लगभग तीन लाख का होता है आवंटन, हो रही बंदरबांट […]

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अधिकतर लोगों को पता भी नहीं कि सन्हौली में चल रहा है औषधालय

संयुक्त औषधालय में आयुर्वेद, होमियोपैथिक, यूनानी पद्धति से होना है इलाज
दवा का पता नहीं, लेकिन मरीजों के इलाज की हो रहा दावा
घर बैठे अधिकतर कर्मी उठा रहे वेतन
प्रति वर्ष लगभग तीन लाख का होता है आवंटन, हो रही बंदरबांट
खगड़िया : 20 वर्षों से शहर से सटे सन्हौली में संचालित आयुर्वेदिक चिकित्सालय के बारे में लोगों को पता भी नहीं है. कहने को संचालित इस देशी चिकित्सालय में मरीजों का इलाज होता है, लेकिन अस्पताल के आलमारी में रखे दवा के खाली डिब्बे इलाज के दावे की पोल खोलने के लिए काफी है. इस औषधालय में तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी के कब दर्शन होंगे यह पता नहीं. कहा जाता है कि औषधालय की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मधुबाला महीने में कभी-कभार ही नजर आती हैं,
लेकिन हाजिरी में सब कुछ सही तरीके से संचालित होने के सारे इंतजाम कर दिये जाते हैं. अब प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ही जब कभी कभार नजर आयेंगी तो दूसरे वैद्य या स्वास्थ्यकर्मी के गायब होने की शिकायत लाजिमी है. इस औषधालय में 12 बजते ही ताला लटक जाता है.
देसी चिकित्सालय को सर्जरी की जरूरत : सन्हौली में संचालित इस औषधालय में आयुर्वेदिक, यूनानी व होमियोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज किया जाना है, लेकिन उक्त औषधालय के बारे में अधिकांश आबादी को जानकारी तक नहीं है. इसके कारण उक्त औषधालय में दिन भर में दो से चार खांसी, फोड़ा- फुंसी के मरीज आ पाते हैं, लेकिन संयुक्त औषधालय के संबंधित चिकित्सकों द्वारा कागज पर मरीजों की संख्या बढ़ा कर दर्ज किया जाता है.
इसके अलावा चिकित्सक व कर्मी दिन के 10 बजे औषधालय आना होता है और 12 बजे औषधालय में ताला जड़ दिया जाता है. वहीं, आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ लेने वाले मरीजों को चिकित्सक नरेश राम के कंपाउंडर द्वारा दवाई के अभाव में परची थमा दिये जाने से मरीज निराश होकर कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं.
कहते हैं चिकित्सक : संयुक्त औषधालय के होमियो पैथिक चिकित्सक डॉ सुनील कुमार साहू ने बताया कि संयुक्त औषधालय में प्रतिवर्ष तीन लाख रुपये का आवंटन दवा खरीद के लिए दिया जाता है. प्रतिदिन 30 से 35 मरीजों का इलाज होमियोपैथिक दवा से किया जाता है.
कहते हैं स्थानीय ग्रामीण: सन्हौली पंचायत के मिथुन कुमार, गौरी शंकर, गौतम पासवान, चंदन कुमार, राज कुमार व रामलगन कुमार आदि ने बताया कि संयुक्त औषधालय के चिकित्सक व कर्मचारी सरकारी राशि का दुरूपयोग कर रहे हैं. सिर्फ खानापूर्ति किया जाता है. चिकित्सक व कर्मी दिन के दस बजे औषधालय आते हैं और 12 बजे तक सभी कर्मचारी अपने अपने घर या निजी क्लिनिक चले जाते हैं. कभी कभी तो सिर्फ कंपाउंडर से काम चलाया जाता है. चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मधुबाला का दर्शन कभी-कभार ही होता है.
28 दवा में से अधिकतर गायब
जिला संयुक्त औषधालय में होमियोपैथिक का दवा 28 प्रकार की दवा रखना अनिवार्य है, लेकिन इसके विरुद्ध मात्र चार से पांच प्रकार के दवाई से मरीजों का इलाज किया जा रहा है. वहीं उक्त औषधालय में दो वर्षों से यूनानी तरीके से इलाज करने की न तो दवा है और न ही चिकित्सक है,
लेकिन सरकार द्वारा प्रतिवर्ष आवंटन प्राप्त किया जा रहा है. वहीं आयुर्वेदिक दवा के लिए उक्त औषधालय में 20 वर्षों से 25 प्रकार की दवाई से मरीजों का इलाज किया जाना है, लेकिन दवा या चूर्ण के नाम पर लवण भास्कर चूर्ण के खाली डिब्बा आलमारी की शोभा जरूर बढ़ा रहा है.
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