मां कात्यायनी मंदिर को पर्यटन स्थल का नहीं मिला दर्जा, भक्त हैं नाराज

Updated at : 11 Jan 2018 5:43 AM (IST)
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मां कात्यायनी मंदिर को पर्यटन स्थल का नहीं मिला दर्जा, भक्त हैं नाराज

कोसी – बागमती के बीच में अवस्थित हैं मां कात्यायनी का मंदिर खगडिया : मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर में अवस्थित चौथम प्रखंड के रोहियार पंचायत के बंगलिया गांव (धमारा घाट ) में मां दुर्गा के छठे स्वरूप के नाम से विख्यात हैं दूध की देवी शक्ति पीठ मां कात्यायनी की महिमा अगम अपार है. […]

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कोसी – बागमती के बीच में अवस्थित हैं मां कात्यायनी का मंदिर

खगडिया : मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर में अवस्थित चौथम प्रखंड के रोहियार पंचायत के बंगलिया गांव (धमारा घाट ) में मां दुर्गा के छठे स्वरूप के नाम से विख्यात हैं दूध की देवी शक्ति पीठ मां कात्यायनी की महिमा अगम अपार है. माता भक्तजनों की मन्नतें पूर्ण करती हैं. सरकार की उदासीनता के कारण मां कात्यायनी मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल सका हैं. इसको लेकर भक्तों में नाराजगी है. बीच बीच में पर्यटन विभाग मरहम लगाकर लोगों को खुश करने में लगे हुए हैं. मां के दरबार में भक्तजनों का जनसैलाब लगी रहती है.
मां कात्यायनी मंदिर का इतिहास : प्रचलित कथा के अनुसार चौथम का राजा मंगल सिंह था. राजा मंगल सिंह एवं सिरपत महाराज दोनों मित्र थे. कहा जाता है सिरपत महाराज हजारों पशुओं का मालिक थे.
गाय चरने के क्रम में जहां वर्तमान में मंदिर है वहां गाय स्वतः दूध स्राव करने लगती थी. जिसे देखकर सिरपत महाराज को भी आश्चर्य होने लगा. इस बात की खबर कानों कान तक फैल गई. चौथम के राजा मंगल सिंह को मां ने स्वप्न दिया. पुनः दोनों मित्र ने खुदाई करवाया. जहां माता का बायां हाथ मिला. सन 1596 ई. मंदिर का निर्माण करवाया गया. आज भी कथाओं में राजा मंगल सिंह एवं सिरपत महाराज की चर्चा विद्यमान हैं.
मंदिर तक जाने के िलए नाव व रेल ही सहारा
मां कात्यायनी मंदिर जाने के लिए नाव एवं रेल का सहारा लेना पड़ता है. जो कठिनप्रद हैं, मंदिर तक पहुंच पथ नहीं होने कारण 19 अगस्त 2013 को मां कात्यायनी मंदिर पूजा अर्चना करने जा रहे 28 श्रद्धालुओं की मौत धमारा रेलवे स्टेशन पर राजरानी एक्सप्रेस ट्रेन से कटकर हो गई थी. उसके बाद भी सरकार की ओर से कोई पहल आज तक नहीं किया गया. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शक्तिपीठ मां कात्यायनी मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन भी किया. लेकिन पर्यटन की बात तो दूर हैं मंदिर तक पहुंच पथ भी नहीं बन सका है. इस मंदिर में बिहार के के हर क्षेत्र से भक्तजन मां की आराधना करने आते हैं.
समबाहु त्रिभुज में स्थापित हैं तीन देवियां
इस शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर से सहरसा जिले के सोनवर्षा प्रखंड के विराटपुर में अवस्थित मां चण्डी देवी एवं महिषी में अवस्थित मां तारा देवी की दूरी एक दूसरे से समान हैं. एवं तीनों देवी समबाहु त्रिभुज की तरह तीन बिंदु पर विराजमान हैं. जो बिहार ही नहीं देश में विख्यात हैं.
दूध चढ़ाने की विशेष परंपरा
दूध की देवी मां कात्यायनी मंदिर में दूध चढ़ाने की विशेष परंपरा है. कोसी इलाके ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के पशुपालकों का गाय जब बच्चे देती हैं, तो पहला दूध मां कात्यायनी स्थान मंदिर में चढ़ाया जाता हैं. इस मंदिर की खास विशेषता है कि जो भक्तगण सच्चे मन से जो माता को दूध चढ़ाने के लिए संकल्प लेकर आते हैं. उसका दूध खराब नहीं होता है. प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को वैरागन का दिन हैं.
कहते हैं जानकार
कोसी काॅलेज के प्राचार्य सह हिन्दी विभागाध्यक्ष डाॅक्टर रामपुजन सिंह बताते हैं कि शक्ति पीठ मां कात्यायनी की कृपा इलाके में विख्यात हैं. यह इलाका श्रम शक्ति पर निर्भर है. प्राकृतिक आपदा बाढ़, सुखाड़ के बाद भी इलाके में न तो कभी अकाल की स्थिति उत्पन्न हुई हैं ओर न होगी. यह माता की असीम कृपा हैं. दुर्गम रास्ते के बावजूद भी इलाके के लोग खुशहाल हैं. ओर भक्तजनों का सैलाब उमड़ती रहतीं है. सैकड़ों परिवारों की जीविका इस मंदिर से चल रही हैं.
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