बालू रेत पर उगता तरबूज किसानों के लिए बन रहा वरदान

बालू रेत पर उगता तरबूज किसानों के लिए बन रहा वरदान
– प्रति एकड़ 80 हजार तक का मुनाफा कुरसेला गंगा-कोसी के दियारा क्षेत्रों में नदियों के क्षरण से बनी बालू रेत पर तरबूज की खेती किसानों के लिए नगदी फसल के रूप में वरदान साबित हो रही है. उपयुक्त भूमि और जलवायु के कारण दियारा के किसान बड़ी संख्या में इस खेती को अपना रहे हैं. तीन महीने की मेहनत के बाद तैयार होने वाली यह फसल किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है. लागत से दोगुना मुनाफा मलेनियां गांव के किसान दिनेश्वर मंडल ने बताया कि एक एकड़ तरबूज की खेती पर 30 से 40 हजार रुपये की लागत आती है. फसल तैयार होने पर 60 से 80 हजार या उससे अधिक का शुद्ध लाभ मिल जाता है. किसान बालू रेत पर विपरीत हालात में कड़ी मेहनत, सिंचाई और खाद का प्रयोग कर खेती को फलित करते हैं. फसल तैयार होने के बाद किसानों को सबसे बड़ी परेशानी बाजार तक फल पहुंचाने में होती है. दियारा क्षेत्र से नाव पर लादकर नदियों को पार करना पड़ता है. फिर ट्रैक्टरों से कुरसेला बाजार तक लाया जाता है. इस दौरान किसानों को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है. 5 से 20 रुपये किलो बिकता है तरबूज किसानों के अनुसार थोक में तरबूज 5 से 20 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है. स्थानीय बाजार में मांग सीमित होने के कारण फल की अधिक आवक पर इसे नेपाल, कोलकाता, रांची, रायपुर, राजस्थान, उड़ीसा, आसनसोल, पानागढ़ तक भेजा जाता है. ट्रांसपोर्टर सज्जाद अली ने बताया कि प्रतिदिन 5 से 10 ट्रक तरबूज नेपाल, कोलकाता, धुलांग, बरगछिया, रांची, रायपुर भेजे जाते हैं. छोटे पिकअप से गया, छपरा, बलिया, खगड़िया, बेगूसराय, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, अररिया भेजा जाता है. रोज 25-50 ट्रैक्टर पहुंचते हैं कुरसेला फल पकने के बाद प्रतिदिन 25 से 50 ट्रैक्टर तरबूज कुरसेला बाजार में बिक्री के लिए आता है. मांग से अधिक आवक होने पर बाहर भेजा जाता है. बाजार में करीब एक माह तक तरबूज की आवक बनी रहेगी. गंगा-कोसी के दियारा में बलधुसर भूमि पर तरबूज के साथ ककड़ी, खीरा, बतिया की भी सैकड़ों एकड़ में खेती होती है. किसान जनवरी में बीज रोपते हैं. कुछ फरवरी में पिछात लगाते हैं. मार्च-अप्रैल तक फल तैयार हो जाता है. ढाई से तीन महीने में फसल बिकने लायक हो जाती है. गर्मी का सुपरफूड है तरबूज तरबूज को गर्मियों का सुपरफूड माना जाता है. इसमें 92% पानी होता है. प्यास बुझाने के साथ स्वाद में मीठा होता है. कोल्ड ड्रिंक की तुलना में स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है. गर्मी में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं.
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लेखक के बारे में
By राजकिशोर
राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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