– स्वर्ण जयंती समारोह में कथा सुनने के लिए उमड़ रही है भीड़ कटिहार श्री श्याम मित्र मंडल कटिहार के 50वां स्थापना दिवस पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह के तीसरे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है. संस्था के स्वर्ण जयंती महोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ स्थानीय राजेन्द्र स्टेडियम के प्रांगण मे बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. महोत्सव स्थल पर शीतलहर का प्रकोप रहने के बावजूद श्री श्याम प्रेमियों का अपने आचार्य श्री गौरवकृष्ण गोस्वामी जी के श्रीमुख से भागवत का पाठ सुनने के लिए कथा स्थल खचाखच भरा रहा. सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी द्वारा भागवत कथा भव्य तरीके से भक्तिमय वातावरण में चल रहा है. श्रद्धालुओं की मानें तो आचार्य श्री गौरवकृष्ण गोस्वामी जी के श्रीमुख से भागवत कथा का श्रवण करना बड़े ही सौभाग्य की बात है. ऐसे आयोजनों से समाज मे साकारात्मक ऊर्जा तथा नैतिक चेतना का विकास होता है. कथा के दौरान आचार्य श्री गौरवकृष्ण गोस्वामी जी की ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर दिख रहे है. श्रीमद् भागवत् सप्ताह कथा के तृतीय दिवस मे श्रद्धेय आचार्य श्री गौरवकृष्ण गोस्वामी जी ने अपने प्रवचन मे कहा कि बिना पोस्टमैन के ही पहुंचने वाला पत्र है प्रार्थना उन्होंने कहा कि प्रार्थना एक ऐसी संस्तुति है, जो अपने इष्ट के प्रति बिना किसी देरी के बिना किसी के सहारे तत्क्षण परमात्मा के पास पहुंच जाती है. उन्होंने बताया कि संसार की किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिये पोस्टमैन की आवश्यकता पड़ती हैं. लेकिन हृदय से समर्पित की गयी प्रार्थना एक ऐसी अभिव्यक्ति है, जो बिना किसी पोस्टमैन के ही तत्क्षण गंतव्य स्थान तक पहुच जाती है. भक्त ध्रुव पर दिया व्यख्यान कथा क्रम में कपिल देव इति सवांद पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री गोस्वामी जी ने कहा कि देवहूति जी ने पति कर्दम के वन की ओर चले जाने पर पुत्र कपिल के पास आयी और प्रार्थना करते हुए बोली कि हे प्रभु हमें संसार के बंधन से मुक्त होने का मार्ग प्रदान करें. मां देवहूति की प्रार्थना को भगवान कपिल ने तत्क्षण स्वीकार किया और ऐसा उपदेश प्रदान किया कि देवहूति जी संसार सागर से मुक्त होकर सिद्धिरा नाम की नदी के रूप में परणित होकर मुक्त हो गयी. आगे सती चरित्र की उपारूपान आचार्य श्री गोस्वामी जी ने विस्तार से श्रोताओ को श्रवण कराया. जिससे कथा प्रांगण का वातावरण शिवमय हो गया. परम भक्त ध्रुव जी के चरित्र पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि मात्र पांच वर्ष की अवस्था में ध्रुव को दर्शन देकर अखण्ड राज्य प्रदान करते हुए उनके लिये ध्रुव लोक का निर्माण कर दिया. आज मनाया जायेगा नन्दोत्सव आचार्य श्री गोस्वामी जी ने अपने प्रवचन मे कहा कि प्रभु के दर्शन के लिये व्यक्ति को सत्संग सेवा सुमिरन में हमेशा लीन रहना चाहिए और अपने को मानव बनाने का प्रयत्न करो. तुम यदि इसमें सफल हो गये तो तुम्हे इस कार्य में सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होगी. कुसंगति की अपेक्षा अकेले रहना सबसे उत्तम कार्य है. श्री श्याम मित्र मंडल ने आने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध किया कि मंगलवार की कथा में विशेष महोत्सव के रूप में श्री कृष्ण जन्म (नन्दोत्सव) विशेष धूम धाम से मनाया जायेगा. आप सभी कथा प्रेमी भक्त सपरिवार सादर आमंत्रित है. स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा दी जा रही सेवा का भरपूर लाभ श्रद्धालु ले रहे है.
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