– रंगारंग भजन कार्यक्रम में झूमते व थिरकते श्रद्धालु कटिहार श्री श्याम मित्र मंडल के तत्वाधान मे आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन भी जारी रही. संस्था के स्वर्ण जयंती समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भक्तजन पूरे श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना कर परम पूज्य स्वामी आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी के श्रीमुख से प्रवाहित दिव्य वाणी का श्रवण कर रहे है एवं आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत है. भक्ति, श्रद्धा और सत्संग से परिपूर्ण यह पावन अवसर कटिहार की आध्यात्मिक चेतना को और सदृढ़ कर रही है. इस ऐतिहासिक कार्यक्रम मे जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग मिल रहा है. साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग अविस्मरणीय है. श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा के पंचम दिवस पर आचार्य श्री गौरवकृष्ण गोस्वामी ने अपने प्रवचन मे कहा कि कटिहार के भक्तजनों को मैं अपने सच्चे हृदय से प्रणाम करता हूं. वाकई कटिहार के लोग धन्य है. इस शीतलहर मे भी भागवत कथा का श्रद्धा पूर्वक शांत मन से कथा का श्रवण करते है. हमारे ठाकुर जी का स्वागत पूरी प्रकृति करती है. आचार्य गोस्वामी ने कहा कि जहां स्वार्थ समाप्त होता है. मानवता वहीं से प्रारम्भ होती है. मानव योनि में जन्म लेने मात्र से जीव को मानवता प्राप्त नहीं होती. यदि मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद भी उसमें स्वार्थ की भावना भरी हुई है तो वह मानव होते हुए भी राक्षसी वृत्ति की पायदान पर खड़ा रहता है. यदि व्यक्ति स्वार्थ की भावना को त्याग कर हमेशा परमार्थ भाव से जीवन यापन करे तो निश्चित रूप से वह एक अच्छा इंसान है. यानी सुदृढ मानवता की श्रेणी में खड़ा होकर पर सेवा कार्य में रत है, क्योंकि परमार्थ की भावना ही व्यक्ति को महान बनाती है. पूतना प्रसंग का किया उल्लेख परमात्मा श्री कृष्ण की लीलाओं में पूतना चरित्र पर व्याख्यान देते हुए आचार्य गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि कंस स्वयं को सब कुछ समझ लिया. हमसे बड़ा कोई न हो, जो हमसे बड़ा बनना चाहे या हमारा विरोधी हो. उसको मार दिया जाय. ऐसा निश्चय कर ब्रज क्षेत्र में जितने बालक पैदा हुए हो. उनको मार डालो और इसके लिये पूतना राक्षसी को भेजा तो प्रभु श्री बालकृष्ण भगवान ने पूतना को मोक्ष प्रदान किया. ही इधर कंस प्रतापी राजा उग्रसेन का पुत्र होते भी स्वार्थ लोलुपता अधिकाधिक होने के कारण राक्षसो की श्रेणी में आ गया और भगवान श्री कृष्ण ने उसका संहार किया. हमेशा प्रेम की भाषा बोलिये माखन चोरी लीला प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री गोस्वामी ने बताया कि दूध, दही, माखन को खा-खाकर कंस के अनुचर बलवान होकर अधर्म को बढावा दे रहे थे. इसलिये प्रभु ने दूध, दही, माखन को मथुरा कंस के अनुचरों के पास जाने से रोका और छोटे-छोटे ग्वाल-बालों को खिलाया. जिससे वे ग्वाल-बाल बलवान बनें और अधर्मी कंस के अनुचरों को परास्त कर सकें. भगवान श्री कृष्ण ग्वाल-बालो से इतना प्रेम करते थे कि उनके साथ बैठकर भोजन करते-करते उनका जूठन तक मांग लेते थे. आचार्य श्री ने कहा कि हम जीवन में वस्तुओं से प्रेम करते है और मनुष्यों का उपयोग करते है. ठीक तो यह है कि हम वस्तुओं का उपयोग करें और मनुष्यों से प्रेम करें. इसलिये हमेशा से प्रेम की भाषा बोलिये. जिसे बहरे भी सुन सकते हैं और गूंगे भी समझ सकते है. प्रभु की माखन चोरी लीला हमें यही शिक्षा प्रदान करती है. आज होगी रुक्मिणी विवाह महोत्सव विशेष महोत्सव के रूप में बुधवार को श्री गिरिराज पूजन (छप्पन भोग महोत्सव) विशेष धूम-धाम से मनाया गया. साथ ही कथा के उपरांत रात्रि बेला मे कटिहार श्री श्याम परिवार द्वारा रंगारंग भजनों की प्रस्तुति हुई. इसमें श्री श्याम प्रेमी भजनों का आनंद लेते हुए खूब झूमे. आयोजकों ने बताया कि गुरुवार की कथा में विशेष महोत्सव के रूप में श्री रुक्मिणी विवाह महोत्सव अति हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा. श्री श्याम मित्र मंडल इस श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम मे सम्मिलित हो रहे श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा है कि यह श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम आप सबों का है. इसे अपना समझते हुए सुचारू, शांतिपूर्ण रूप से संचालित करने एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए आप लोगों का अहम योगदान की आवश्यकता है.
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