प्रभात खास: – थ्री टी यानी टेस्ट, टॉक व ट्रीटमेंट पर जोर- बेटियों की बराबरी के लिए इक्विटी कार्यक्रम के तहत मिला निर्देश कटिहार सखी सहायता डेस्क एक लाख से अधिक बेटियों की आवाज बनेगी. इसके लिए कटिहार जिला सहित राज्य के सभी हाईस्कूल और प्लस टू स्कूलों में सखी सहायता डेस्क बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. कटिहार जिले के भी 259 स्कूलों में यह सखी सहायता डेस्क बनेगा. बेटियों की बराबरी के लिए इक्विटी कार्यक्रम के तहत यह पहल की गयी है. जिले के सभी माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को 15 जनवरी तक इसकी स्थापना का निर्देश दिया गया है. बिहार शिक्षा परियोजना परिषद पटना के दिशानिर्देश के आलोक में प्रारंभिक शिक्षा व समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने जिले के सभी माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक को आदेश जारी किया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा के साथ बेटियों के आत्मविश्वास, आगे बढ़ने पर इसके।जरिए काम होगा. टी थ्री यानी टेस्ट, टॉक और ट्रीटमेंट पर बेटियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच होगी. हर स्कूलों को सखी सहायता डेस्क के संचालन के लिए सात-सात हजार की राशि निर्धारित की गयी है. साथ ही किशोर होती बेटियों को यह सखी सहायता डेस्क हर तरह से रास्ता दिखायेगा. इसके लिए स्कूलवार सात-सात हजार का बजट बनाकर दिया गया है कि यह राशि किस-किस मद में खर्च की जायेगी. जारी दिशानिर्देश में यह भी कहा गया है कि सभी स्कूलों में सहायता डेस्क की स्थापना के लिए एक अलग कक्ष रखा जायेगा. अगर कक्ष की कमी है तो किसी कक्ष में एक कोना इसके लिए सुरक्षित रखा जायेगा. वहां टेबुल कुर्सी, आलमारी, एक छोटा कैबिनेट रखकर इस जगह को काफी व्यवस्थित किया जायेगा. डीपीओ की ओर से जारी आदेश में इसको लेकर भी सभी संबंधित प्रधानाध्यापक व प्रभारी प्रधानाध्यापक को स्पष्ट निर्देश दिया गया है. हर शनिवार को होगी गतिविधियां विभागीय दिशानिर्देश के अनुसार जिले के साथ-साथ राज्य के सभी उच्च विद्यालय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हर महीने की आठ तारीख को किशोरी स्वास्थ्य दिवस मनाया जायेगा. निर्देशित किया गया है कि इसमें स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से सभी किशोरियों की स्वास्थ्य जांच करायी जायेगी. जिला स्तर के अधिकारियों के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी जांच कार्यक्रम के दौरान बुलाया जायेगा. साथ ही जांच में जिसका स्वास्थ्य सबसे बेहतर पाया जायेगा. उसे पुरस्कृत भी किया जायेगा. ताकि स्वास्थ्य के प्रति बच्चियों में जागरूकता आये और वे हर स्तर पर अपना ध्यान रख सकें. इसके साथ ही हर शनिवार को सखी सहायता डेस्क के माध्यम से कितनी बच्चियों की समस्याओं का समाधान हुआ. इसकी समीक्षा होगी और केस फाइल बनायी जायेगी. महिला शिक्षिका होगी नोडल बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से जारी दिशानिर्देश के आलोक में डीपीओ के आदेश में कहा गया है कि सखी डेस्क के लिए सभी हाईस्कूल और प्लस टू स्कूल में एक-एक महिला शिक्षक को नोडल के तौर पर चयनित करने का निर्देश दिया है. जिस स्कूल में महिला शिक्षक नहीं होंगी, वहीं पुरुष शिक्षक को नोडल बनाना है. माना जा रहा है कि नोडल शिक्षक को सखी सहायता डेस्क चलाने को जिला स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. सभी संबंधित स्कूलों को सखी सहायता डेस्क का बैनर तैयार कर उपलब्ध कराना है. सहायता डेस्क के पास किशोरी स्वास्थ्य से संबंधित प्राथमिक चिकित्सा किट भी उपलब्ध रहेगी.
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