15 साल से सामुदायिक भवन में चल रहा प्रावि बघुवाकोल

Updated at : 16 Jan 2026 6:49 PM (IST)
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15 साल से सामुदायिक भवन में चल रहा प्रावि बघुवाकोल

15 साल से सामुदायिक भवन में चल रहा प्रावि बघुवाकोल

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– कक्षा एक से पांच तक के बच्चे एक कमरे में पढ़ने को मजबूर हसनगंज प्रखंड के जगरनाथपुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय बघवाकोल विभागीय उपेक्षाओं का दंश झेल रहा है..15 साल से विद्यालय एक सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है. जिससे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल स्थिति में है. विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई एक ही कमरे में संचालित हो रही है. जबकि उसी कमरे के आधे हिस्से में विद्यालय का कार्यालय भी बना हुआ है. ऐसे में शिक्षा के स्तर का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. बताया जाता है कि करीब 15 वर्ष पूर्व विद्यालय के पास अपनी भूमि नहीं होने के कारण इसे गांव के सामुदायिक भवन में शिफ्ट किया गया था. तब से अब तक विद्यालय बिना शौचालय और रसोईघर के संचालित हो रहा है. तीन शिक्षकों के इस विद्यालय में कुल 68 बच्चे नामांकित हैं. जिन्हें एक ही कमरे में पांचों कक्षाओं की पढ़ाई करनी पड़ रही है. भवन का फर्श भी काफी जर्जर और क्षतिग्रस्त अवस्था में है. विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालय को समय-समय पर विकास और मरम्मत मद में मिलने वाली राशि का उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है. जबकि भवन और सुविधाओं की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है. विद्यालय शिक्षा समिति की सदस्य सीमा देवी ने बताया कि विद्यालय के पास अपनी जमीन नहीं होने के कारण सामुदायिक भवन में पढ़ाई करानी पड़ रही है. बच्चों को पढ़ने में काफी परेशानी होती है. विद्यालय में एक महिला शिक्षिका और दो पुरुष शिक्षक हैं. इसके बावजूद शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चों को शौच के लिए बाहर जंगल जाना पड़ता है. जिससे शिक्षकों और बच्चों दोनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस समस्या की जानकारी कई बार विभाग को दी गयी., लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और स्वच्छता को लेकर कई योजनाएं चला रही है, लेकिन शिक्षा के मंदिर विद्यालय में शौचालय तक व्यवस्था नहीं है. इतने वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जो बेहद चिंताजनक है.. विद्यालय की रसोइया चुन्नी देवी, मंजिला देवी ने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच शिक्षक किसी तरह पठन-पाठन और मध्याह्न भोजन योजना को संभालने को मजबूर हैं. रसोईघर नहीं होने के कारण जर्जर बरामदे और कमरे में ही एमडीएम भोजन बनाना पड़ता है. कई बार विभाग से किचन शेड निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. यदि जल्द रसोईघर और अतिरिक्त वर्ग कक्षों की व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा. कहते हैं प्रधानाध्यापक इस संबंध में प्रधानाध्यापक रफीक आलम ने बताया कि विद्यालय सामुदायिक भवन में संचालित है. सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ता है. शौचालय और रसोईघर की कमी सबसे बड़ी समस्या है. जिसको लेकर विभाग से लगातार मांग की जा रही है.

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