कच्ची सड़क से होकर आवागमन को विवश लोग
कदवा. प्रखंड क्षेत्र के टी-वन कोठी टोला से कचौरा भाया मंझेली पथ पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत 357.93 लाख राशि की लागत से निर्मित उच्चस्तरीय आरसीसी पुल भ्रष्ट तंत्र और संवेदक की मनमानी की भेंट चढ़ चुका है. हैरानी की बात यह है कि पुल निर्माण की निर्धारित समाप्ति तिथि को एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज तक पुल का एप्रोच निर्माण कार्य नहीं हो पाया है, जिससे यह करोड़ों की योजना कागजों तक सिमट कर रह गयी है. पुल के दोनों छोर पर एप्रोच नहीं होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों, किसानों, छात्रों और मरीजों को जान जोखिम में डालकर वैकल्पिक रास्तों से आवागमन करना पड़ रहा है. बरसात के मौसम में स्थिति बद से बदतर हो जाती है. जब कीचड़ और जलजमाव के कारण रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि संवेदक द्वारा मनमाने ढंग से कार्य अधूरा छोड़ दिया गया. संबंधित विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कुंभकर्णीय नींद में सोए हुए हैं. बावजूद इसके न तो संवेदक पर कोई कार्रवाई हुई और न ही कार्य पूरा कराने को लेकर कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है. साथ ही ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इस तरह की लापरवाही से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना की साख पर दाग लग रहा है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को इसका समुचित लाभ नहीं मिलना सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और संभावित घोटाले की ओर इंगित करता है.इसको लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वरीय अधिकारियों से संवेदक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और पूल एप्रोच निर्माण कार्य को अविलंब पूर्ण कराने तथा मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का मांग की है. पूरे मामले को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटेगी या फिर 357.93 लाख की लागत से निर्मित पूल यूं ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ कर रह जायेगी.
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