पिता की छोटी दुकान बनी प्रेरणा, 388वीं रैंक के साथ BPSC में ग्रामीण विकास अधिकारी बने सौरभ
सौरभ कुमार अकेला
Saurabh Kumar Akela RDO: कटिहार जिले के बरारी प्रखंड के सुदूर बाढ़ग्रस्त दियारा क्षेत्र से एक अद्भुत सफलता की कहानी सामने आई है. मोहनाडीह गांव के एक साधारण दुकानदार के बेटे सौरभ कुमार अकेला ने सीमित संसाधनों को मात देकर 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में 388वीं रैंक हासिल की है.
मुख्य बातें:
बरारी (कटिहार) से हरजीत सिंह की रिपोर्ट
Saurabh Kumar Akela RDO: बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र अंतर्गत कटिहार जिले के बरारी प्रखंड से एक बेहद प्रेरणादायी और गौरवमयी खबर सामने आई है. कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और लक्ष्य के प्रति सच्ची निष्ठा, तो सुदूर और पिछड़े इलाकों की बंदिशें भी आपका रास्ता नहीं रोक सकतीं. इस बात को बरारी प्रखंड की मोहनाचाँद पुर पंचायत स्थित मोहनाडीह गांव निवासी सौरभ कुमार अकेला ने सच साबित कर दिखाया है. शनिवार को घोषित हुए 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के फाइनल रिजल्ट में सौरभ ने पूरे राज्य में 388वीं रैंक हासिल कर अपने गांव और जिले का नाम रोशन किया है.
ग्रामीण विकास अधिकारी के पद पर हुआ चयन
सौरभ की इस ऐतिहासिक सफलता और उनके प्रशासनिक पद से जुड़े मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं. बीपीएससी की अंतिम मेधा सूची के अनुसार, सौरभ कुमार अकेला का चयन ग्रामीण विकास अधिकारी (Rural Development Officer – RDO) के गरिमामय पद पर हुआ है.
सौरभ एक ऐसे सुदूर दियारा क्षेत्र से आते हैं जो हर साल भीषण बाढ़, कटन और आवागमन के घोर संकट से जूझता है. इस पिछड़े इलाके से निकलकर राज्य सरकार के राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) के पद तक पहुंचना उनकी असाधारण मेधा को दर्शाता है.
पिता चलाते हैं छोटी दुकान, तंगहाली में भी नहीं रुकने दी पढ़ाई

सौरभ के पारिवारिक पृष्ठभूमि और संघर्षों की कड़ियां बेहद भावुक करने वाली हैं. उनके पिता श्रीकांत मिश्र साहिबगंज में एक छोटी-मोटी दुकान चलाकर बेहद कठिनाई से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. दियारा क्षेत्र में बिजली, इंटरनेट और सड़कों का अभाव हमेशा से पढ़ाई के आड़े आता रहा, ऊपर से आर्थिक तंगी का भी बड़ा साया था.
इसके बावजूद पिता ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बेटे की किताबों और पढ़ाई के खर्च में लगा दिया, लेकिन सौरभ के हौसलों को कभी टूटने नहीं दिया. आज बेटे की 388वीं रैंक ने पिता के उस लंबे त्याग और संघर्ष का कर्ज चुका दिया है.
सरकारी स्कूल से पटना यूनिवर्सिटी तक का शैक्षणिक सफर
सौरभ के शैक्षणिक सफर और प्रारंभिक कड़ियों पर नजर डालें तो उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक साधारण सरकारी विद्यालय से हुई थी. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे पटना चले गए, जहां उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित बीएन कॉलेज (B.N. College) से स्नातक (Graduation) की डिग्री पूरी की.
इसके बाद उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से विधि (LLB) की पढ़ाई भी संपन्न की. आर्थिक तंगी के कारण सौरभ पटना में रहकर किसी नामचीन और महंगे कोचिंग संस्थान की फीस नहीं भर सकते थे, इसलिए उन्होंने सेल्फ स्टडी (स्व-अध्ययन) का रास्ता चुना.
“पटना विवि की लाइब्रेरी ही मेरा कोचिंग संस्थान”
“अपनी इस शानदार कामयाबी पर बात करते हुए नवनियुक्त आरडीओ सौरभ कुमार अकेला ने कहा कि हमारे दियारा क्षेत्र में कोचिंग तो दूर, बेसिक इंटरनेट तक का संकट था. ऐसे में पटना विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी और वहां के सीनियर छात्र ही मेरे सबसे बड़े मार्गदर्शक और कोचिंग बने. मैंने लगातार पुस्तकालयों में बैठकर नोट्स बनाए. यह 388वीं रैंक मेरे गांव के हर उस गरीब बच्चे के नाम है, जो बेहद कम संसाधनों में भी अपनी आंखों में बड़े प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना संजोए बैठा है.”
समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं पहुंचाना है लक्ष्य
सौरभ की इस अभूतपूर्व सफलता पर उनके चाचा ऋषि कान्त मिश्र, जो स्वयं पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं, काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सौरभ ने यह साबित कर दिया है कि पक्के इरादे से दियारा के कच्चे रास्तों से भी पटना के प्रशासनिक गलियारों तक का सफर तय किया जा सकता है.
सौरभ ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि चूंकि वे स्वयं एक बाढ़ग्रस्त और पिछड़े इलाके से आते हैं, इसलिए उनका मुख्य लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में रहकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना और दियारा क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को दूर करना होगा.
Saurabh Kumar Akela RDO: पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर, ग्रामीणों ने जताया हर्ष
सौरभ के ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के पद पर चयनित होने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, वैसे ही पूरे मोहनाचांदपुर और भवानीपुर इलाके में मिठाई बांटने और आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया. सौरभ की इस बड़ी कामयाबी पर पूर्व मुखिया ब्रम्हानंद साह, बलराज यादव, भवानीपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटि, जयप्रकाश राय, अशोक राय, काशीनाथ राय, गौतम राय, ओमप्रकाश पांडे, शुभ नारायण राय, कन्हैया सिंह, संजय कुमार सिंह, अखिलेश कुमार सिंह और पैक्स अध्यक्ष अंशु सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त किया है. सभी ने एक सुर में कहा कि गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं को झेलते हुए सौरभ ने जो मुकाम पाया है, वह पूरे कटिहार के लिए ऐतिहासिक है.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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