दो अंगीभूत B.Ed कॉलेजों में नियुक्ति घोटाले और वित्तीय गड़बड़ी की जांच शुरू
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 07 Jun 2026 10:54 AM
बी.एड विभाग
Purnia University: पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत कटिहार के डीएस कॉलेज और अररिया के फारबिसगंज कॉलेज के बी.एड (B.Ed) विभागों में हुए कथित शिक्षक-कर्मचारी नियुक्ति घोटाले और भारी वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है. कुलपति के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय जांच समिति को सात कार्यदिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है.
कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट
Purnia University: पूर्णिया विश्वविद्यालय (PU) के अंतर्गत आने वाले दो बड़े अंगीभूत महाविद्यालयों—डीएस कॉलेज (कटिहार) और फारबिसगंज कॉलेज (फारबिसगंज) के बी.एड विभागों में खलबली मच गई है. विश्वविद्यालय को मिली गंभीर शिकायतों के बाद, कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह के कड़े आदेश पर एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है. यह समिति इन दोनों कॉलेजों के बी.एड विभागों में नियमों को ताक पर रखकर की गई शिक्षकों व गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्तियों और लाखों रुपये के वित्तीय घालमेल (वित्तीय अनियमितता) की बारीकी से जांच करेगी. विवि के कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार ने 5 जून 2026 को इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर समिति के कार्य और दायित्व तय कर दिए हैं. इस आदेश के बाद से गलत तरीके से नौकरी पाने वाले शिक्षकों और कर्मियों के पांव फूलने लगे हैं.
प्रो. अरविंद कुमार वर्मा बने संयोजक; ये अधिकारी हैं जांच टीम में शामिल
- संयोजक (Convenor): पूर्णिया विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW) प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को इस पांच सदस्यीय समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है.
- समिति के सदस्य:
- डॉ. संजीव कुमार (प्राचार्य, मारवाड़ी कॉलेज, किशनगंज)
- डॉ. अनंत प्रसाद गुप्ता (प्राचार्य, पूर्णिया महिला कॉलेज)
- सुनील कुमार (बजट अधिकारी, पूर्णिया विश्वविद्यालय)
- सदस्य सचिव: डॉ. मनीष कुमार (उपकुलसचिव, स्थापना, पूर्णिया विश्वविद्यालय) को जिम्मेदारी सौंपी गई है.
इन 5 मुख्य बिंदुओं पर टिकी है जांच; खंगाले जाएंगे एनसीटीई के नियम
- नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता: डीएस कॉलेज, कटिहार के बी.एड विभाग में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बहाली के लिए अपनाई गई पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता जांची जाएगी.
- NCTE गाइडलाइंस की समीक्षा: क्या इन नियुक्तियों में विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) और राजभवन के निर्देशों व प्रासंगिक नियमों का कड़ाई से पालन किया गया था या नहीं?
- वित्तीय अभिलेखों की स्क्रूटनी: दोनों बी.एड विभागों (कटिहार और फारबिसगंज) के पिछले वर्षों के वित्तीय दस्तावेजों, खर्चों (व्यय) और आंतरिक वित्तीय प्रक्रियाओं की गहन ऑडिटिंग होगी.
- स्पष्टीकरण और गवाही: आवश्यकता पड़ने पर समिति संबंधित प्राचार्यों, पूर्व पदाधिकारियों और संदेहास्पद कर्मचारियों को समन जारी कर स्पष्टीकरण और मूल दस्तावेज मांग सकती है.
- अनुशंसा और एक्शन रिपोर्ट: समिति सभी तथ्यों का विश्लेषण कर 7 कार्यदिवसों (Working Days) के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट और दोषियों पर की जाने वाली कार्रवाई की अनुशंसा विश्वविद्यालय को सौंपेगी.
छात्र नेता के आवेदन और तत्कालीन प्राचार्य की रिपोर्ट से खुला था राज
वर्ष 2020 में हुई बहालियों पर शक की सुई: इस बड़े एक्शन की पृष्ठभूमि सात महीने पहले तैयार हुई थी. पूर्णिया के छात्र नेता सौरभ कुमार ने 18 नवंबर 2025 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव सहित महामहिम राज्यपाल (बिहार) और राजभवन के सचिव को एक लिखित शिकायती पत्र भेजा था. इस आवेदन में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2019-20 के दौरान नियमों को दरकिनार कर इन बी.एड विभागों में प्राध्यापकों की बहाली की गई थी, जिनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों (डॉक्यूमेंट्स) की विश्वविद्यालय द्वारा आज तक कोई जांच नहीं कराई गई. छात्र नेता ने आशंका जताई थी कि बहाल किए गए कई शिक्षकों के सर्टिफिकेट पूरी तरह फर्जी हैं.
इसके अतिरिक्त, डीएस कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य प्रो. डॉ. संजीव कुमार भी पूर्व में अपने स्तर से एक जांच कर चुके थे, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों और वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि हुई थी और उन्होंने विवि को रिपोर्ट भेजी थी. अब दोबारा बड़ी कमेटी बनने से कॉलेज प्रशासन में हड़कंप है. कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार ने दोनों कॉलेजों के वर्तमान प्राचार्यों और बी.एड विभागाध्यक्षों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे जांच कमेटी के मांगते ही सभी आवश्यक वित्तीय और प्रशासनिक फाइलें तुरंत उपलब्ध कराएं, अन्यथा इसे प्रशासनिक असहयोग मानकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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