भवाड़ा में 500 बीघा मक्का की फसल बर्बाद, लागत भी निकालना हुआ मुश्किल
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 05 Jun 2026 12:29 PM
मक्का की फसल का हाल
Farmers: कटिहार जिले की भवाड़ा पंचायत में इस बार आई आंधी और बेमौसम बारिश ने मक्का किसानों की कमर तोड़ दी है. कदेपुरा गांव के करीब 100 किसानों की 500 बीघा में लगी मक्के की फसल भारी नुकसान की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे पूरे इलाके के अन्नदाताओं में हाहाकार मचा हुआ है.
कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट
Farmers: कटिहार जिले के भवाड़ा पंचायत अंतर्गत कदेपुरा गांव के मक्का उत्पादक किसानों के समक्ष इस वर्ष गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. अपनी उपजाऊ भूमि और वृहद पैमाने पर मक्के की खेती के लिए जाने जाने वाले इस क्षेत्र के किसान कुदरत की मार और बाजार की बेरुखी से दोहरी मार झेल रहे हैं. हाल के दिनों में आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के कारण लगभग 500 बीघा में लहलहाती मक्के की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. फसल गिरने और दाने खराब होने से किसानों के सारे अरमान धरे के धरे रह गए हैं. अब कर्ज के बोझ तले दबे इन लाचार किसानों की निगाहें सरकार और कृषि विभाग से मिलने वाले मुआवजे पर टिकी हुई हैं.
₹30 हजार लागत और आधी से कम उपज; लागत भी नहीं हो रही पूरी
- उत्पादन में भारी गिरावट: किसान संजय यादव, अरझा विश्वास, जितेन्द्र यादव और उपेन्द्र यादव ने बताया कि सामान्य वर्षों में अनुकूल मौसम रहने पर यहाँ प्रति बीघा करीब 45 क्विंटल मक्के की बंपर पैदावार होती थी. लेकिन इस बार आंधी-पानी के कारण 75 प्रतिशत से भी अधिक फसल नष्ट हो चुकी है.
- हाड़-तोड़ लागत: किसानों के अनुसार, एक बीघा मक्के की खेती तैयार करने में करीब 30 हजार रुपये का नगद खर्च आता है. इसमें ₹20,000 उत्तम खाद-बीज व पटवन में और ₹10,000 फसल की कटाई व थ्रेसिंग में खर्च होते हैं.
खराब दाने और कम कीमत ने तोड़ी कमर; ₹1800 में बेचने की मजबूरी
बाजार की मंदी की मार: पीड़ित किसान मनोज यादव, विनोद यादव, दशरथ यादव और रमेशचन्द्र यादव ने बताया कि इस बार प्रकृति की मार के कारण मक्के के दाने बदरंग और खराब हो गए हैं. यही वजह है कि जब वे अपनी फसल लेकर बाजार पहुंचे, तो गल्ला व्यापारियों ने महज 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल का ही भाव लगाया, जबकि इससे पिछले सीजन में मक्का 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक आसानी से बिका था. कम उत्पादन और ऊपर से घटे हुए दामों के कारण किसानों को अपनी मूल लागत तक नसीब नहीं हो रही है. किसानों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मक्का मूलतः खरीफ की फसल है, लेकिन कटिहार के वातावरण के अनुकूल वे इसे रबी मौसम में भी मुख्य नकदी फसल के रूप में लगाते हैं.
तय मानक के अनुरूप मिलेगा मुआवजा; पोर्टल खुलने पर करना होगा आवेदन
भवाड़ा पंचायत के किसानों के इस हाहाकार और फसल क्षति को लेकर जिला प्रशासन गंभीर नजर आ रहा है. इस संबंध में कटिहार के जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) मिथिलेश कुमार ने बताया:
“सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग के तय नियमों और मानकों के अनुरूप पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा. इसके लिए प्रभावित सभी पंचायतों में नुकसान हुई फसलों का जमीनी स्तर पर भौतिक आंकलन (Assessment) कराया गया है. नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को बिहार राज्य फसल सहायता बीमा योजना के तहत ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा. हालांकि, तकनीकी कारणों से फिलहाल यह पोर्टल बंद है, लेकिन खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जैसे ही पोर्टल दोबारा खुलेगा, किसान इस पर अपना आवेदन दर्ज कर सकेंगे.”
फिलहाल, कदेपुरा गांव के किसानों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी बदहाली को देखते हुए विशेष पैकेज या अंतरिम राहत राशि तुरंत जारी की जाए, ताकि वे अगली फसल के लिए खेत तैयार कर सकें और नए बीज-खाद का प्रबंध कर सकें.
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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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