20 साल से पुल का इंतजार, नाव के भरोसे महानंदा पार कर रहे हजारों लोग

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नाव से नदी पार करते लोग        

नाव से नदी पार करते लोग

कटिहार के बलिया बेलौन में महानंदा नदी पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से अधूरी है. हजारों लोग आज भी नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं, जिससे दैनिक जीवन और खेती-बाड़ी में भारी दिक्कतें हो रही हैं. चुनाव के वादों के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल न होने से लोगों में निराशा है.

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कटिहार के बलिया बेलौन से तबस्सुम यजदानी की रिपोर्ट

बलिया बेलौन, कटिहार : रैंयापुर घाट पर महानंदा नदी पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से लंबित है. पुल नहीं बनने के कारण आज भी क्षेत्र के हजारों लोग नाव के सहारे नदी पार करने को विवश हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो दशकों से लगातार मांग और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बावजूद अब तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है. इससे लोगों में जनप्रतिनिधियों और सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है.

आठ पंचायतों के लोगों की बढ़ी परेशानी

क्षेत्र संख्या-18 के जिला परिषद सदस्य मुनतसिर अहमद ने बताया कि बलिया बेलौन क्षेत्र की करीब आठ पंचायतों के लोग कदवा प्रखंड मुख्यालय, कटिहार और पूर्णिया जाने के लिए रोजाना नाव से महानंदा नदी पार करने को मजबूर हैं. किसानों को भी खेती-बाड़ी के कार्यों के लिए नदी पार करनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

बाढ़ के समय बढ़ जाता है खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात और बाढ़ के दिनों में महानंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है. ऐसे समय नाव से आवागमन जोखिम भरा हो जाता है. यदि नदी उफान पर आ जाए तो हजारों लोगों का संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो सकता है.

सर्वे के बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण

ग्रामीणों ने बताया कि रैंयापुर घाट पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए विभागीय अभियंताओं द्वारा स्थल निरीक्षण, मापी और मिट्टी की जांच भी कराई जा चुकी है. इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. इससे लोगों में निराशा है.

पुल बनने से 20 किलोमीटर की दूरी होगी कम

स्थानीय लोगों के अनुसार महानंदा नदी के दोनों ओर पहले से पक्की सड़क बनी हुई है. यदि रैंयापुर घाट पर पुल का निर्माण हो जाए तो करीब 20 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी. इससे चौकी और कुरूम हाट सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और रोजगार व व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे.

हर चुनाव में मिलता है आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक चुनाव में जनप्रतिनिधि अपने घोषणा पत्र में रैंयापुर घाट पर पुल निर्माण का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती. लगातार मिल रहे आश्वासनों के बावजूद पुल नहीं बनने से लोगों का भरोसा अब टूटने लगा है.

और पढ़ें :बैरिया पंचायत में जलजमाव से आवागमन प्रभावित, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी


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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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