फलका में फ्लोराइड की मार, कई परिवारों का जीवन बना अभिशाप

फलका में फ्लोराइड की मार, कई परिवारों का जीवन बना अभिशाप
फलका फलका प्रखंड के सालेहपुर पंचायत स्थित वार्ड संख्या छह में दूषित व फ्लोराइड युक्त पानी ने कई परिवारों का जीवन संकट में डाल दिया है. यहां कई बच्चों में शारीरिक व मानसिक विकलांगता के लक्षण देखने को मिल रहे हैं. बच्चों का सिर व कद सामान्य से छोटा है. जबकि कान असामान्य रूप से बड़े दिखाई देते हैं. कई बच्चे बधिरता एवं मानसिक विकास में कमी की समस्या से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों से चापाकल के पानी का उपयोग करने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. गांव निवासी नियाजुद्दीन उर्फ नाजो ने बताया कि उनकी शादी वर्ष 1991 में हुई थी. उनके तीनों बच्चे दिव्यांगता के शिकार हैं. बड़ी बेटी सफीना, पुत्र औरंगजेब तथा अली का शारीरिक विकास सामान्य बच्चों की तुलना में अलग है. उन्होंने बताया कि मजदूरी और खेती कर बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं. कई चिकित्सकों को दिखाने एवं महंगी जांच कराने के बाद डॉक्टरों ने पानी की गुणवत्ता खराब होने की आशंका जताई थी. इसी गांव में उनके बड़े भाई शमीम के तीनों बच्चे भी बधिरता एवं मानसिक दिव्यांगता से पीड़ित हैं. लोगों ने कहा, वार्ड में करीब एक दर्जन बच्चे किसी न किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक विकलांगता से जूझ रहे हैं. फलका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अश्वनी कुमार ने बताया कि पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक होने पर इस प्रकार के लक्षण सामने आ सकते हैं. सालेहपुर वार्ड छह में बच्चों के प्रभावित होने की सूचना मिली है. जांच कर रिपोर्ट विभाग को भेजी जायेगी. जिसके बाद बीमारी के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा. स्थानीय मुखिया अब्दुल माजिद ने बताया कि लगभग दस से बारह वर्ष पूर्व पीएचईडी विभाग द्वारा पंचायत के कई चापाकलों में पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा पाए जाने पर लाल निशान लगाया था. बाद में इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. समय बीतने के साथ लोग फिर उन्हीं चापाकलों का पानी उपयोग करने लगे. ग्रामीणों का दावा है कि कुछ चापाकलों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से पांच से सात गुना तक अधिक पाई गई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पीने के पानी में फ्लोराइड की मानक सीमा 0.5 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक मानी जाती है. इससे अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. फलका सीएचसी के आंकड़ों के अनुसार प्रखंड में करीब 1600 लोग विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से प्रभावित हैं. सामाजिक सुरक्षा विभाग के अनुसार 1347 लोग दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ ले रहे हैं. लगातार नए आवेदन आने से विकलांगता के बढ़ते मामलों को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पानी की गुणवत्ता की विशेष जांच कराने, प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने तथा लोगों को जागरूक करने की मांग की है. बोले स्थानीय जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मुखिया अब्दुल माजिद, पैक्स अध्यक्ष जमीरउद्दीन, समाजसेवी इकराम, सरपंच आमिल, एबाद, वार्ड सदस्य आसिफ एकबाल समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि वार्ड छह में दूषित पानी के कारण बच्चे अपंगता के शिकार हो रहे हैं. ग्रामीण विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. कहते हैं पीएचईडी अधिकारी पीएचईडी विभाग के जूनियर इंजीनियर फखरुद्दीन ने बताया कि वह हाल ही में यहां पदस्थापित हुए हैं. कहा कि क्षेत्र के पानी में आयरन की अधिकता की जानकारी है. जबकि फ्लोराइड की मात्रा की जांच कराए जाने के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी. सरकार द्वारा जल नल योजना लगने से लोगों क़ो कुछ आस जगी थी. लेकिन वह पंचायत में फ्लॉप हो गया. जल नल योजना में भी शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है.
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