पनामा विल्ट के बाद मत्स्य पालन बना किसानों का सहारा, सालाना लाखों रुपये कमा रहे किसान
Published by : Shruti Kumari Updated At : 08 Jun 2026 12:09 PM
फलका में तालाब से मछली निकालते किसान
Katihar Fish Farming: वर्तमान में फलका प्रखंड के दर्जनों किसान और युवा उद्यमी लगभग 70 से 80 एकड़ क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कर रहे हैं. युवा किसान अमित वत्सल ने अपनी पांच एकड़ भूमि में दो बड़े तालाब बनाकर सफल मत्स्य पालन की मिसाल पेश की है.
कटिहार के फलका से अली अहमद की रिपोर्ट:
Katihar Fish Farming: कहते हैं कि मेहनत, दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प से विपरीत परिस्थितियों को भी अवसर में बदला जा सकता है. कटिहार जिले के फलका प्रखंड के किसानों ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है. कभी केला, धान और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान आज मत्स्य पालन के जरिए आत्मनिर्भर बन रहे हैं और सालाना लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं.
फलका क्षेत्र एक समय केला उत्पादन के लिए जाना जाता था, लेकिन पनामा विल्ट नामक घातक बीमारी ने यहां की केले की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया. बीमारी के कारण हजारों एकड़ में फैले केले के बागान प्रभावित हुए और किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया. ऐसे समय में कई किसानों ने नए विकल्प की तलाश करते हुए मत्स्य पालन को अपनाया.
70 से 80 एकड़ में हो रहा वैज्ञानिक मत्स्य पालन
वर्तमान में फलका प्रखंड के दर्जनों किसान और युवा उद्यमी लगभग 70 से 80 एकड़ क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कर रहे हैं. युवा किसान अमित वत्सल ने अपनी पांच एकड़ भूमि में दो बड़े तालाब बनाकर सफल मत्स्य पालन की मिसाल पेश की है.
इसके अलावा वसीम राजा, सुनील कुमार गुप्ता, मो. शमसेर आलम, राघव सिंह, शंकर सिंह, मो. आजाद, मो. इबरार आलम, मो. जियाउल, मनोज कुमार और वकील अहमद सहित कई किसान देसी एवं विदेशी प्रजाति की मछलियों का उत्पादन कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं.
सरकारी योजनाओं से मिला बढ़ावा
किसानों का कहना है कि मत्स्य विभाग और सरकार की विभिन्न योजनाओं से उन्हें लगातार सहयोग मिल रहा है. तालाब निर्माण, मछली बीज और मछली आहार पर मिलने वाली सब्सिडी ने इस व्यवसाय को नई गति दी है. इससे उत्पादन लागत में कमी आई है और मुनाफा बढ़ा है.
प्रगतिशील किसान अमित वत्सल का कहना है कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा हो गया है. मौसम की अनिश्चितता और फसलों में लगने वाली बीमारियों के कारण नुकसान की आशंका बनी रहती है. ऐसे में मत्स्य पालन किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प साबित हो रहा है.
प्रशिक्षण से मिल रही नई तकनीक की जानकारी
प्रखंड कृषि पदाधिकारी सौरव कुमार ने बताया कि किसानों के कौशल विकास के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों की जानकारी देने के लिए किसानों को आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी भेजा जाता है, जहां वे उन्नत मत्स्य पालन की तकनीक सीखकर अपने क्षेत्र में लागू कर रहे हैं.
युवाओं के लिए बन रही प्रेरणा
फलका के किसानों की यह सफलता अब आसपास के गांवों के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है. मत्स्य पालन के बढ़ते रुझान ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.
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