जामुन के पेड़ क्षेत्र से हो रहे गायब

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जामुन के पेड़ क्षेत्र से हो रहे गायब

जामुन के पेड़ क्षेत्र से हो रहे गायब

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कोढ़ा कोढ़ा प्रखंड समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में कभी आंगन-आंगन जामुन के पेड़ देखे जाते थे. लेकिन अब यह दृश्य इतिहास बनने लगा है. पहले हर घर के पास जामुन का एक पेड़ जरूर हुआ करता था. जो न केवल छांव देता था बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद होता था. कोढ़ा के चौक-चौराहों पर गर्मियों के मौसम में जामुन बेचने वालों की कतार लगी रहती थी लेकिन अब वैसी भीड़ और ठेले नजर नहीं आते. पर्यावरणीय बदलाव, शहरीकरण और लोगों की बदलती प्राथमिकताओं के चलते जामुन के पेड़ व उससे जुड़ी परंपराएं दोनों ही लुप्त होती जा रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार जामुन डायबिटीज कंट्रोल करने, पाचन तंत्र मजबूत बनाने, हृदय स्वास्थ्य बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और त्वचा में निखार लाने में सहायक होता है. बावजूद इसके न तो अब लोग पेड़ लगाते हैं और न ही बच्चों को इसके फायदों की जानकारी दी जाती है.

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राजकिशोर

लेखक के बारे में

By राजकिशोर

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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