आवेदक का पक्ष जाने बगैर दाखिल-खारिज को रिजेक्ट नहीं कर सकते अंचलाधिकारी

Updated at : 10 May 2024 10:57 PM (IST)
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कटिहार. दाखिल खारिज आवेदनों को अस्वीकृत करने से पूर्व आवेदक का पक्ष जानना जरूरी है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह समाहर्ता सह जिला पदाधिकारी को इस आशय का दिशा निर्देश देते हुए इसके अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा है. डीएम को लिखे पत्र में विभाग के अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि भूमि की दाखिल-खारिज आवेदनों की समीक्षा के क्रम में यह ज्ञात हुआ है कि इन आवेदनों पर कर्मचारी की ओर से किसी भी प्रकार की आपत्ति लगाने पर बिना आवेदक का पक्ष सुने अंचल अधिकारी व राजस्व अधिकारियों द्वारा दाखिल-खारिज अस्वीकृत कर दिया जाता है. पत्र में इस बात का भी जिक्र कि अगर एक बार दाखिल-खारिज का आवेदन अस्वीकृत हो जाता है तो आवेदक को उसकी अपील में भूमि सुधार उपसमाहर्त्ता के न्यायालय में जाना पड़ता है. जबकि कई बार कोई दस्तावेज अपठनीय रहने अथवा प्रासंगिक दस्तावेज छूट जाने के कारण भी आवेदन में आपत्तियां लगायी जा सकती है. डीएम को लिखे पत्र में कहा गया है कि दाखिल-खारिज की संपूर्ण प्रक्रिया अधिनियम के तहत प्रावधानित है एवं इस अधिनियम में सुनवाई एवं साक्ष्य दोनों के प्रावधान दिये हुए है.

आवेदक को है अपना पक्ष रखने का अधिकार

डीएम को लिखे पत्र में कहा गया है कि दाखिल-खारिज अधिनियम 2011 के अध्याय चार की धारा 5 (5) के तहत यह प्रावधानित है कि यदि अंचल अधिकारी, कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक की जांच पड़ताल से संतुष्ट नहीं हो तो उस रीति से जिसे वह उचित समझे. वह स्वयं जांच कर सकेगा तथा अपना निष्कर्ष विहित रीति से अभीलिखित करेगा. इसी प्रकार से अध्याय पांच की धारा 6 (2) के तहत आपत्ति की प्राप्ति के उपरांत संबंधित पक्षों को सुनवाई एवं साक्ष्य का अवसर देने का प्रावधान किया गया है. इसी अध्याय की धारा 6 (5) के तहत यह प्रावधानित है कि दाखिल-खारिज याचिका को अस्वीकृत किये जाने की स्थिति में अंचलाधिकारी अपने आदेश फलक में उन आधारों को अभिलिखित करेगा. जिनके आधार पर उसे अस्वीकृत किया गया हो तथा याचिकाकर्त्ता को उन आधारों का जिनपर याचिका अस्वीकृत की गयी हो. संक्षिप्त विवरणी देते हुए विहित रीति से सूचित करेगा. विभाग की ओर से जारी दिशानिर्देश में यह भी कहा गया है कि धारा 6 (5) के अनुपालन एवं प्राकृतिक न्याय की दृष्टिकोण से यह आवश्यक एवं न्यायोचित है कि किसी भी वाद को अस्वीकृत करने से पूर्व संबंधित याचिकाकर्त्ता को आपत्ति की सूचना देते हुए उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाय.

सीओ व आरओ को करें निर्देशित

अपर मुख्य अतिथि ने डीएम से कहा है कि वह अपने अधीनस्थ अंचलाधिकारी एवं राजस्व पदाधिकारियों को यह निर्देशित करें कि जिन भी दाखिल-खारिज आवेदनों में कर्मचारी द्वारा अथवा अन्य किसी माध्यम से प्राप्त आपत्ति के आधार पर अस्वीकृति की स्थिति बनती हो तो अस्वीकृत करने से पूर्व संबंधित याचिकाकर्त्ता को नोटिस देते हुए प्रासंगिक आपत्ति से अवगत कराया जाय एवं उन्हें अपना पक्ष एवं आवश्यक साक्ष्य देने का अवसर प्रदान करने तथा सुनवाई के उपरांत ही यदि वैधानिक हो तो अस्वीकृत करने की कार्रवाई की जाय. अर्थात किसी भी परिस्थिति में अस्वीकृति का आदेश बिना आवेदक को सूचित किये एवं उसकी सुनवाई किये बगैर नहीं की जाय. साथ ही आदेश में इस सुनवाई के दौरान आवेदक द्वारा प्रस्तुत किये गये कागजातों एवं साक्ष्यों को दर्ज किया जाय एवं उसके बाद आत्मभारित आदेश के द्वारा ही यदि अस्वीकृत करना वैधानिक हो तो दाखिल-खारिज को अस्वीकृत किया जाय. इस विभागीय निर्देश की प्रति सभी अंचलाधिकारियों एवं राजस्व पदाधिकारियों को भी गयी है तथा इसके अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

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