– मिट्टी की कीमतों में वृद्धि के बाद भी श्रद्धा के साथ मूर्ति को दे रहे रूप रंग कटिहार आसमान छूती महंगाई पर आस्था आज भी भारी है. मिट्टी की कीमतों में बेतहासा वृद्धि के बाद भी श्रद्धा व विश्वास के साथ मूर्ति को रूप व रंग देने में मूर्तिकार जुटे हुए हैं. जिस आस्था व विश्वास से मूर्तिकार पूर्व में माता सरस्वती की प्रतिमा का निर्माण करते थे आज भी कर रहे हैं. जिले भर के कई जगहाें पर मूर्तिकार खानदानी कला का उपयोग कर वर्षों से मूर्ति के साथ खुद के जीवन में रंग भर रहे हैं. 23 जनवरी को इस वर्ष सरस्वती पूजा है. धीरे धीरे पूजा को लेकर युवाओं में उत्साह देखी जा रही है. चंदा काठी कर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित पूजा अर्चना करने को उत्साहित हैं. खासकर कॉलेज, स्कूल व कोचिंग संस्थानों में पढाई करने वाले छात्र-छात्राएं जी जान से लगे हुए हैं. सिरसा स्थित एसबीपी विद्या विहार से पूर्व एनएच 131ए के बायीं किनारे करीब पचास वर्षों से मां सरस्वती की प्रतिमा का निर्माण कर रहे अरूण मंडल का कहना है कि उनसे पूर्व उनके दादा, पिता पिता चमरू मंडल और अब वे इस कला का उपयोग कर रहे हैं. रानी पतरा के कुंदन राय का कहना है वे लोग हर साल करीब दो सौ मूर्ति बनाते हैं. मूर्ति निर्माण के लिए चयनित जगह का दो से तीन माह तक किराया देते हैं. पिछले वर्ष से अचानक मिट्टी के दामों में आयी उछाल के कारण थोड़ी परेशानी होती है. पूजा के दिन तक बनायी गयी मूर्तियां से मजदूरी निकल जाती है. कुल मिलाकर खानदानी कला विलुप्त न हो जाये. इसके लिए वे संभाल कर रखना चाहते हैं. हालांकि अभी से ही श्रद्धालु श्रद्धा के साथ माता सरस्वती की प्रतिमा का अग्रिम बुकिंग कराने पहुंच रहे हैं. पांच से छह हजार तक लगती है मूर्तियों की कीमत काली स्थान सिरसा निवासी अरूण मंडल कहते हैं कि उनके द्वारा बनायी गयी मूर्तियां की मांग अधिक है. खासकर लोकल स्तर पर सुंदर आकृतियों वाली मूर्तियां की श्रद्धालु काफी पसंद करते हैं. एक हजार से लेकर छह हजार तक मूर्तियाें की मांग होती है. इस वजह से वे लोग दो माह पूर्व से ही मूर्ति बनाने में लग जाते हैं. उनका कहना है कि इसके अलावा शादी विवाह में मड़वा सजाने से लेकर मौर्य तक का निर्माण करते हैं. साथ ही घरौटी का भी काम कर लेते हैं.
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