मानसून की पहली बारिश में ही टापू बना अमदाबाद का वार्ड-13
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 07 Jun 2026 1:08 PM
वार्ड-13 में बाढ़ जैसे हालात
Waterlogging Crisis: कटिहार जिले के अमदाबाद नगर पंचायत में मानसून की पहली झमाझम बारिश ने ही प्रशासनिक दावों की पूरी पोल खोल दी है. वार्ड संख्या 13 (नया टोला गोविंदपुर) में ड्रेनेज सिस्टम फेल होने से सड़कें तालाब बन चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों को घुटने भर पानी में चलने को मजबूर होना पड़ रहा है.
कटिहार के अमदाबाद से मनोज कुमार की रिपोर्ट
Waterlogging Crisis: मानसून की शुरुआत होते ही सीमांचल के निचले इलाकों में जलजमाव का संकट गहराने लगा है. कटिहार जिला अंतर्गत अमदाबाद नगर पंचायत प्रशासन द्वारा जल निकासी (ड्रेनेज) को लेकर किए गए तमाम कागजी दावे पहली ही झमाझम बारिश में ताश के पत्तों की तरह ढह गए. नगर पंचायत के वार्ड संख्या 13 (नया टोला गोविंदपुर) में मूसलाधार बारिश के बाद स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित और बाढ़ जैसी हो गई है. मुख्य संपर्क मार्गों से लेकर ग्रामीणों के घरों के आंगनों तक में एक फीट से अधिक गंदा पानी जमा हो गया है, जिससे स्थानीय जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है.
जल निकासी की व्यवस्था शून्य; हल्की बारिश में भी कैद हो जाते हैं ग्रामीण
- तालाब में तब्दील हुईं सड़कें: स्थानीय ग्रामीण गौतम कुमार, विजय कुमार और अन्य युवाओं ने ग्राउंड जीरो पर रोष व्यक्त करते हुए बताया कि पूरे गांव में पानी निकासी के लिए नाले या किसी अन्य वैकल्पिक ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण आज तक नहीं कराया गया है.
- आवागमन पूरी तरह ठप: जलजमाव का आलम यह है कि मुख्य सड़कों पर घुटने भर पानी जमा है, जिससे स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है. दुपहिया वाहन चालक लगातार इन अदृश्य गड्डों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं.
संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा; जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश
महामारी की दहलीज पर गांव: ग्रामीणों का कहना है कि सड़कों पर जमा यह गंदा पानी धूप के कारण सड़ने लगा है. निकासी न होने से कई दिनों तक जमा रहने वाला यह प्रदूषित जल मच्छरों, मक्खियों और हानिकारक बैक्टीरिया का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. इसके चलते मोहल्ले में टाइफाइड, मलेरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी गंभीर संक्रामक बीमारियों (महामारी) के फैलने का खतरा चौबीसों घंटे मंडरा रहा है.
स्थाई समाधान की पुरजोर मांग:
वार्ड वासियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले स्थानीय जनप्रतिनिधि और नगर पंचायत अमदाबाद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) इस विकट समस्या को जानने के बावजूद पूरी तरह मौन साधे हुए हैं. अधिकारियों की इस घोर संवेदनहीनता के कारण टैक्स देने वाले नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है.
स्थानीय निवासियों ने कटिहार जिला प्रशासन, जिलाधिकारी और संबंधित वरीय पदाधिकारियों से आधिकारिक रूप से मांग की है कि इस समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए तत्काल सक्शन पंपों के जरिए जमे हुए पानी को बाहर निकाला जाए. साथ ही, गांव को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाने के लिए भविष्य में पक्के कंक्रीट नाले का निर्माण कर जल निकासी की स्थाई और वैज्ञानिक व्यवस्था कराई जाए, ताकि मानसून के आने वाले महीनों में ग्रामीणों को किसी बड़ी विपदा का सामना न करना पड़े.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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