जिले में हर दिन 313 बच्चे ले रहे जन्म

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विश्व जनसंख्या दिवस . कटिहार में दम तोड़ रहा परिवार कल्याण कार्यक्रम भले ही केंद्र व राज्य सरकार बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए परिवार नियोजन सहित कई कार्यक्रम चला रही है. पर, जिले में इसका परिणाम सार्थक रूप से सामने नहीं आ रहा है. कटिहार : सोमवार यानी 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या […]

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विश्व जनसंख्या दिवस . कटिहार में दम तोड़ रहा परिवार कल्याण कार्यक्रम

भले ही केंद्र व राज्य सरकार बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए परिवार नियोजन सहित कई कार्यक्रम चला रही है. पर, जिले में इसका परिणाम सार्थक रूप से सामने नहीं आ रहा है.
कटिहार : सोमवार यानी 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस है. इस दिन से परिवार कल्याण पखवारा की शुरुआत होती रही है. परिवार कल्याण पखवारा के तहत 15 दिनों तक सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन कार्यक्रम सहित अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है. तमाम कोशिशों के बावजूद बढ़ती आबादी पर ब्रेक नहीं लग रहा है. कुछ शिक्षित व समझ वाले परिवार में आबादी कम करने को लेकर जागरूकता जरूर है,
लेकिन अधिसंख्य लोगों के बीच आज भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोई खास जागरूकता नहीं आयी है. कटिहार जिले में हर साल लाखों की आबादी बढ़ रही है. स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता की वजह से जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम दम तोड़ रहा है. सोमवार को होने वाले विश्व जनसंख्या दिवस को लेकर प्रभात खबर ने विभिन्न स्तरों पर पड़ताल की है. पड़ताल के दौरान यह बात सामने आयी कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पूरी तरह न केवल उदासीन है, बल्कि सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम के क्रियान्वयन के प्रति दिलचस्पी भी कम है.
33 लाख पार कर चुकी है कटिहार की आबादी : कटिहार जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 30 लाख के आसपास आबादी रही है. आज यह आबादी बढ़कर 33 लाख से अधिक हो चुकी है. दरअसल जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चलाये जा रहे सरकारी व गैर सरकारी अभियान पूरी तरह कारगर नहीं हो रहे हैं. सरकार द्वारा जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए चलाये जा रहे परिवार नियोजन सहित अन्य कार्यक्रम भी फ्लॉप साबित हो रहे हैं. जानकारों की मानें, तो विभागीय उदासीनता की वजह से परिवार नियोजन कार्यक्रम का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है.
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों पर भरोसा करें, तो कटिहार जिले में हर दिन औसतन 313 बच्चों का जन्म सरकारी अस्पतालों में हो रहा है. सिविल सर्जन की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2016 में कुल 9398 बच्चों का जन्म प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल, सदर अस्पताल जैसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में हुआ है. स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 100293 संस्थागत प्रसव कराने का लक्ष्य रखा गया है.
चालू वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल 2016 से जून 2016 तक कुल 29177 बच्चों का जन्म सरकारी अस्पतालों में हुआ है. अगर निजी नर्सिंग होम व क्लिनिक में जन्म लेने वाले बच्चों के आंकड़ाें को जोड़ दिया जाये, तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जायेगा.
1987 से हुई इसकी शुरुआत
प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को मनाये जाने वाले विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत वर्ष 1987 में हुई. तेज गति से बढ़ती आबादी के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल यह दिवस मनाया जाता है. खासकर यह दिवस नयी पीढ़ियों को बेहतर जीवन देने का संदेश देता है. बढ़‍ती आबादी से होने वाले परेशानियों व समस्याओं से आम लोगों को अवगत कराया जाता है. इस दिवस पर विभिन्न गतिविधियों द्वारा आम लोगों को जागरूक किया जाता है.
बंध्याकरण में 56 प्रतिशत पीछे
जिले में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता की वजह से जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए चलाये जा रहा परिवार कल्याण कार्यक्रम दम तोड़ रहा है. वित्तीय वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार, कटिहार जिले में 32412 महिलाओं का बंध्याकरण करने का लक्ष्य रखा गया था. इसमें मात्र 44 प्रतिशत महिलाओं का ही बंध्याकरण हो सका. यानी कटिहार जिला बंध्याकरण के मामले में अपने लक्ष्य से 56 प्रतिशत पीछे रह गया. परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत आइयूडी, सीसी यूजर्स सहित अन्य योजनाओं की भी कमोबेश यही स्थिति रही है.
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