जच्चा-बच्चा की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा

Updated at : 06 Aug 2019 7:55 AM (IST)
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जच्चा-बच्चा की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा

कटिहार : हम नहीं सुधरेंगे के तर्ज पर सदर अस्पताल की कुव्यवस्था अपनी चरम सीमा पर है. लगातार चिकित्सकों की लापरवाही के कारण सदर अस्पताल परिसर रणभूमि बना रहता है. ताजा मामला रविवार का है. 12 घंटे बीते भी नहीं थे की चिकित्सक की लापरवाही एक बार फिर जच्चा और बच्चा की मौत का कारण […]

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कटिहार : हम नहीं सुधरेंगे के तर्ज पर सदर अस्पताल की कुव्यवस्था अपनी चरम सीमा पर है. लगातार चिकित्सकों की लापरवाही के कारण सदर अस्पताल परिसर रणभूमि बना रहता है.

ताजा मामला रविवार का है. 12 घंटे बीते भी नहीं थे की चिकित्सक की लापरवाही एक बार फिर जच्चा और बच्चा की मौत का कारण बन गया. देर रात लापरवाही के कारण आजमनगर कि बिजली खातून और उनकी नवजात की मौत हो गयी.
परिजनों ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर चिकित्सक मौजूद नहीं रहने के कारण मरीज की जान चली गयी. परिजनों ने बताया कि शनिवार को सुबह 11:00 बजे प्रसव पीड़ा होने के बाद सदर अस्पताल में बिजली को भर्ती कराया था. लेकिन रविवार की रात्रि 9:00 बजे डिलीवरी हुई. नवजात की मौत उसी समय हो गयी.
जबकि कुछ देर बाद मां की भी मौत हो गयी. परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए सदर अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया. परिजनों ने बताया कि अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य के नाम पर पैसे की मांग की जाती है. यदि पैसा नहीं दिया जाय तो मरीज को यूं ही छोड़ दिया जाता है. जबकि रात के समय डॉक्टर चैन की नींद लेते हैं और सभी भाड़ नर्स पर छोड़ दिया जाता है.
ड्यूटी के दौरान चिकित्सक रहते हैं गायब : पिछले कुछ दिनों से सदर अस्पताल में चिकित्सक के नदारद रहने से कई मरीजों की जान चली गयी है. लेकिन आज तक अस्पताल प्रशासन द्वारा जांच करने के आश्वासन पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
जिसका कारण है कि अस्पताल के चिकित्सक और कर्मियों के हौसले बुलंद है. रोजाना सैकड़ों गरीब मरीज अस्पताल अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं. जबकि आधे से अधिक मरीज बिना इलाज कराये बैरंग वापस लौट जाते हैं.
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों का सही से इलाज नहीं हो पा रहा है, जबकि आउटडोर के समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक भी अपनी ड्युटी से गायब हो जाते हैं. सोमवार को भी शिशु वार्ड के बाहर बड़ी संख्या में मरीज चिकित्सक का इंतजार कर रहे थे.
लाल कोठी से आई अमृता देवी, बनिया टोला की गोरी दास, गरेरी टोला की अंजली देवी, मनिहारी से शीला देवी, हपला से आरती देवी, काढ़ागोला से नीलम कुमारी अपने बच्चों का इलाज कराने पहुंचे थे. सभी ने बताया कि ड्यूटी के दौरान चिकित्सक इलाज करते हुए गायब हो जाते हैं. कई बच्चों की तबीयत काफी खराब थी. बहरहाल अस्पताल प्रशासन पल्ला झाड़ने में लगे रहते हैं.
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