यज्ञ अधिवेशन में संतों ने किया प्रवचन
Author Prabhat khabar digital desk
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कटिहार : भारतीय भमर्णशील मानस प्रचार प्रसार मंडल के तत्वाधान में कोढ़ा के नंद ग्राम जरलाही में तीन दिवसीय यज्ञ अधिवेशन सोमवार से प्रारंभ होने के साथ ही वहां का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है. यज्ञ अधिवेशन के दौरान राधा कृष्ण, राम सीता दरबार के अलावा कई भगवान की प्रतिमा भी स्थापित की गयी […]
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कटिहार : भारतीय भमर्णशील मानस प्रचार प्रसार मंडल के तत्वाधान में कोढ़ा के नंद ग्राम जरलाही में तीन दिवसीय यज्ञ अधिवेशन सोमवार से प्रारंभ होने के साथ ही वहां का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.
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यज्ञ अधिवेशन के दौरान राधा कृष्ण, राम सीता दरबार के अलावा कई भगवान की प्रतिमा भी स्थापित की गयी है. यज्ञ के शुरुआत से पहले बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा निकाला. जिसमें विवाहिता महिलाओं के साथ किशोरी, युवती भी माथे पर कलश लिए नदी से पानी भर कर यज्ञ स्थल पर पहुंचे. यज्ञ को संपन्न कराने को लेकर दूरदराज से भी कई महापुरुष पहुंचे हुए हैं.
उत्तर प्रदेश संतोषचार्य महाराज का आगमन हुआ है. महापुरुषों के प्रवचन का भी आयोजन किया गया है. प्रवचन के दूसरे दिन मंगलवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रवचन सुनने के लिए पहुंचे. प्रवचन दे रहे संतोषा आचार्य महाराज ने कहा कि भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है. मानव योनि में जन्म लेना मतलब ईश्वर के कई उद्देश्य को पूरा करना है. ईश्वर सभी जीवों पर अपनी कृपा करते हैं.
लेकिन मानव जीवन सबसे सर्वश्रेष्ठ है. क्योकि मानव एक दूसरे की पीड़ा व दर्द को खुद महसूस करता है. दूसरे के प्रति हीन भावना छल कपट जैसे कार्यों से बचना चाहिए. जो आप बोएंगे वहीं आप काटेंगे. इसलिए किसी का अहित न करें. किसी के साथ छल कपट न करें.
ईश्वर सब देखता है हमेशा प्रेम भाव बनाए रखें. भूषण जी महाराज ने भी प्रवचन प्रस्तुत किये. भूषण जी महाराज ने कहा की सुख संपत्ति भक्ति का बाधक है. जो संपत्ति को अपना समझता है. उसके लिए भक्ति बाधक है. धन की तीन गति होती है. दान, भोग और नाश जो संपत्ति दान में दिया जाता है. वह सर्वश्रेष्ठ संपत्ति है.
दान से जो बच जाए उसे जो भोगता है. वह मध्यम वर्ग की संपत्ति कहलाता है. यह दोनों गति से जो धन बच जाता है तो वह नाश में जाता है. बाहर से आये महाराज को श्रद्धालुओं ने एक टक सुना. कार्यक्रम को सफल बनाने में कैलाश प्रसाद सिंह, सुधीर सिंह, भरत यादव, नंदकिशोर, देवन, दिनेश कुमार, कैलाशपति, भूपेंद्र, साधो, विनोद, सतीश, रविंद्र झा, भीखन, हरदेव, डॉ विपिन कुमार सिंह, डॉ मीरा कुमारी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी अहम भूमिका निभायी.
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