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दुर्गावती में फैक्ट्रियों में कामगारों का हो रहा शोषण

Updated at : 16 Dec 2025 4:04 PM (IST)
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दुर्गावती में फैक्ट्रियों में कामगारों का हो रहा शोषण

अकुशल मजदूरों को प्रतिदिन 428 रुपये की दर से मजदूरी देना अनिवार्य

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– 12 घंटे की ड्यूटी में 340 रुपये प्रतिदिन की दर से दी जा रही मजदूरी 12 घंटे की ड्यूटी में न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान अकुशल मजदूरों को प्रतिदिन 428 रुपये की दर से मजदूरी देना अनिवार्य शिकायत या आवाज उठाने पर मजदूरों को हटाने की दी जाती है धमकी कर्मनाशा. दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र में अवस्थित फैक्ट्रियों में कार्यरत कामगारों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है. कामगारों से 12 घंटे की ड्यूटी कराकर मात्र 340 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है. जबकि, बिहार सरकार के आदेशानुसार आठ घंटे की ड्यूटी के लिए 428 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देना अनिवार्य है. मजदूरों द्वारा आवाज उठाने पर उन्हें नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है, जिससे रोजी-रोटी छीने जाने के डर से कामगार चुप रहने को मजबूर हैं. दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत भानपुर रोड स्थित गोविंदा पॉलिटेक प्लास्टिक बोरा कंपनी व छांव रोड में स्थित एस लक्ष्मी दोना पत्तल कंपनी सहित करीब दो दर्जन से अधिक कंपनियों में निवेश किया गया है. इन कंपनियों में सैकड़ों की संख्या में कामगार कार्यरत हैं. एस लक्ष्मी कंपनी में कार्यरत कामगारों ने बताया कि उनसे 12 घंटे कार्य लेकर मात्र 11 हजार रुपये मासिक भुगतान किया जाता है. वहीं, महिलाओं को आठ घंटे की ड्यूटी के बदले 5500 रुपये महीना दिया जाता है. इसी तरह गोविंदा पॉलिटेक कंपनी में कामगारों को 12 घंटे की ड्यूटी के लिए 340 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाती है. महिलाओं को आठ घंटे की ड्यूटी के बदले 200 से 250 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा है. मजदूरों का कहना है कि इतनी कम मजदूरी में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है, लेकिन नौकरी जाने के भय से वे अपने हक की आवाज उठाने से डरते हैं. यह शोषण काफी दिनों से जारी है और आवाज उठाने वाले मजदूरों को कंपनी से हटा दिया जाता है. अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप छांव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि गजानंद यादव ने बताया कि दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों कंपनियां संचालित हैं, लेकिन दो-तीन कंपनियों को छोड़कर अधिकतर कंपनियां मजदूरों का शोषण कर रही हैं. हालांकि, अब कुछ मजदूर जागरूक हो रहे हैं और नाम न छापने की शर्त पर अपनी समस्याएं सामने रख रहे हैं. उन्होंने कहा कि एस लक्ष्मी कंपनी में 12 घंटे की ड्यूटी कराकर 11 हजार रुपये व महिलाओं को आठ घंटे के बदले 5500 रुपये महीना दिया जा रहा है. वहीं, गोविंदा पॉलिटेक कंपनी में 340 रुपये प्रतिदिन तथा महिलाओं को 200 से 250 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है, जो सरकारी दर से काफी कम है. उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से मजदूरों का शोषण किया जा रहा है. कहते हैं कंपनी के अधिकारी व कर्मी एस लक्ष्मी कंपनी के इंचार्ज अखिल कुमार राय ने बताया कि उनके यहां सभी वर्कर कांट्रैक्ट बेसिस पर हैं. कंपनी ठेकेदार को पूरा भुगतान कर देती है. ठेकेदार मजदूरों को क्या देता है, इसके लिए ठेकेदार से ही बात की जाये. गोविंदा पॉलिटेक कंपनी के जीएम हरि सिंह बघेल ने बताया कि कंपनी में अलग-अलग तरह के वर्कर हैं और उनके काम के अनुसार भुगतान किया जाता है. मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने पर विचार किया जायेगा. बोले फैक्ट्री निरीक्षक श्रम विभाग के फैक्ट्री निरीक्षक एमडी हदीस ने बताया कि मजदूरों द्वारा आवेदन मिलने के बाद ही कार्रवाई की जायेगी. बिना शिकायत के कार्रवाई संभव नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अकुशल मजदूरों को प्रतिदिन 428 रुपये की दर से मजदूरी देना अनिवार्य है. शिकायत मिलने पर संबंधित फैक्ट्री पर कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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