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भभुआ रोड स्टेशन पर स्थायी स्वीपर की व्यवस्था नहीं, हो रही परेशानी

Updated at : 22 Dec 2025 3:29 PM (IST)
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भभुआ रोड स्टेशन पर स्थायी स्वीपर की व्यवस्था नहीं, हो रही परेशानी

ट्रेन से दुर्घटना के बाद पर सासाराम व डेहरी से बुलाने पड़ते हैं स्वीपर

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कब बदलेगी व्यवस्था?, रेल दुर्घटना होने के बाद घंटों ट्रैक पर पड़ा रहता शव # ट्रेन से दुर्घटना के बाद पर सासाराम व डेहरी से बुलाने पड़ते हैं स्वीपर मोहनिया शहर. गया–डीडीयू रेलखंड स्थित भभुआ रोड रेलवे स्टेशन पर स्थायी स्वीपर की व्यवस्था नहीं होने के कारण रेल दुर्घटना के बाद शव घंटों रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहता है. इससे जहां मृतक के परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं जीआरपी पुलिस भी असहज स्थिति में फंस जाती है. जानकारी के अनुसार, कैमूर जिला क्षेत्र में यदि किसी व्यक्ति की ट्रेन से कटकर मौत हो जाती है तो शव उठाने के लिए स्वीपर सासाराम या डेहरी से बुलाना पड़ता है. यह कोई नयी बात नहीं है, बल्कि वर्षों से यही व्यवस्था चली आ रही है. कर्मनाशा स्टेशन से लेकर कुदरा तक के बीच यदि रेल दुर्घटना होती है, तो स्वीपर के अभाव में शव घंटों ट्रैक पर पड़ा रहता है. खासकर तब स्थिति और गंभीर हो जाती है जब मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाती है. पहचान होने की स्थिति में परिजनों की मदद से किसी तरह शव को ट्रैक से हटाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है. एक ही समय में यदि दो अलग-अलग स्थानों पर रेल दुर्घटना हो जाये, तो समस्या और बढ़ जाती है. कर्मनाशा से लेकर सोननगर तक महज दो स्वीपर प्रतिनियुक्त हैं, ऐसे में एक से अधिक घटना होने पर तत्काल कार्रवाई संभव नहीं हो पाती है. इससे ट्रेनों के परिचालन में भी काफी विलंब होता है. गौरतलब है कि स्थानीय थाना क्षेत्र में सड़क व अन्य दुर्घटनाओं में मौत होने पर स्थानीय पुलिस द्वारा शव उठाने की व्यवस्था कर ली जाती है, लेकिन जीआरपी थाना क्षेत्र में रेल दुर्घटना होने पर स्वीपर के इंतजार में शव घंटों ट्रैक पर ही पड़ा रहता है, जिससे परिचालन सहित अन्य परेशानियां बढ़ जाती हैं. बी ग्रेड स्टेशन, लेकिन सुविधाएं नदारद भभुआ रोड स्टेशन को भले ही बी ग्रेड का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां सुविधाओं की स्थिति बेहद दयनीय है. स्टेशन पर न तो स्थायी स्वीपर की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त ट्रेनों का ठहराव होता है. यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं भी सीमित हैं. बताया जाता है कि भभुआ रोड स्टेशन से प्रतिदिन लगभग तीन से चार लाख रुपये की आमदनी होती है, इसके बावजूद विभाग द्वारा यहां एक भी स्थायी स्वीपर की नियुक्ति नहीं की गयी है. इससे यात्रियों के साथ-साथ जीआरपी पुलिस को भी परेशानी झेलनी पड़ती है. क्या कहते हैं जीआरपी प्रभारी इस संबंध में भभुआ रोड जीआरपी थाना प्रभारी मुन्ना सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की ट्रेन की चपेट में आने से मौत होती है, तो यहां स्वीपर की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसी स्थिति में सासाराम या डेहरी से स्वीपर बुलाना पड़ता है, इसी कारण शव हटाने में काफी देरी हो जाती है. उन्होंने कहा कि यदि स्टेशन पर ही स्वीपर की प्रतिनियुक्ति कर दी जाये, तो काफी सहूलियत होगी व अनावश्यक परेशानियों से बचा जा सकेगा. अज्ञात शवों के मामले में सबसे अधिक परेशानी होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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