टाउन हाइस्कूल में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई में खानापूर्ति

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व्यावसायिक शिक्षा बेपटरी, एक शिक्षक के भरोसे प्रैक्टिकल व थ्योरी

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व्यावसायिक शिक्षा बेपटरी, एक शिक्षक के भरोसे प्रैक्टिकल व थ्योरी नामांकन लेने वाले छात्र परेशान, नयी शिक्षा नीति के उद्देश्य पर सवाल छठी कक्षा से वोकेशनल पढ़ाई का सपना कागजों में सिमटने की आशंका भभुआ नगर. नयी शिक्षा नीति के तहत छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार परक बनाने के उद्देश्य से बिहार में अब छठी कक्षा से ही वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई कराये जाने की योजना है. सरकार का दावा है कि इससे छात्रों में कौशल विकास होगा और वे आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है. जिले का सबसे पुराना व प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान भभुआ स्थित प्लस टू टाउन हाइस्कूल इस व्यवस्था की बदहाली का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है. अंग्रेजों के जमाने से मशहूर टाउन हाइस्कूल में करीब चार वर्ष पहले व्यावसायिक शिक्षा यानी वोकेशनल कोर्स का उद्घाटन बड़े उत्साह के साथ किया गया था. छात्रों का नामांकन भी हुआ और उम्मीद जगी कि स्थानीय स्तर पर तकनीकी व रोजगार परक शिक्षा का लाभ मिलेगा, लेकिन यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी. उद्घाटन के महज एक वर्ष के भीतर ही व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रतिनियुक्त दो शिक्षक, एक थ्योरी व एक प्रैक्टिकल, अपने मूल पदस्थापन पर लौट गये. शिक्षकों के चले जाने के बाद विद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा पूरी तरह से बेपटरी हो गयी, जो आज तक नहीं सुधर पायी है. हालात इतने खराब रहे कि दो वर्षों तक छात्रों को बिना नियमित पढ़ाई के ही व्यावसायिक विषय की परीक्षा देनी पड़ी. न तो समय पर थ्योरी की कक्षाएं हुई और न ही प्रैक्टिकल का समुचित अभ्यास कराया गया. इसका सीधा असर छात्रों की गुणवत्ता व कौशल पर पड़ना तय माना जा रहा है, जो नयी शिक्षा नीति के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करता है. हालांकि, विगत आठ महीनों से विद्यालय में एक शिक्षक की तैनाती की गयी है, लेकिन एक ही शिक्षक के भरोसे थ्योरी व प्रैक्टिकल दोनों की पढ़ाई कराना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन साबित हो रहा है. संसाधनों की कमी, लैब की सीमित सुविधा व अतिरिक्त कार्यभार के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है. छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल औपचारिकता निभाने के लिए पढ़ाया जा रहा है, जबकि व्यावसायिक शिक्षा का मूल उद्देश्य हाथों-हाथ कौशल सिखाना होता है. प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती की उठी मांग इधर, जिले के कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो छठी कक्षा से वोकेशनल शिक्षा लागू करने का सपना केवल कागजों में ही सिमट कर रह जायेगा. स्थानीय अभिभावकों व छात्रों ने जिला शिक्षा विभाग से मांग की है कि टाउन हाइस्कूल में अविलंब कम से कम दो पूर्णकालिक प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती की जाये और प्रैक्टिकल संसाधनों को दुरुस्त किया जाये. कुल मिलाकर, नयी शिक्षा नीति के तहत रोजगार परक शिक्षा का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब जमीनी स्तर पर शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था व बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जायें, अन्यथा ऐसी योजनाएं सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह जायेगी.

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